दो बेटियों को जहर देने के बाद खुद भी दी जान
0 घूरपुर के कंजासा में घटना, बालू मजदूर था मृतक
0 जहर मिला शरबत पहले बेटियों को पिलाया, फिर खुद पीया
अमर उजाला ब्यूरो
घूरपुर (प्रयागराज)। थाना क्षेत्र के कंजासा गांव में हृदयविदारक घटना हुई। यहां बालू मजदूर ने दो बेटियों को जहर मिला शरबत पिलाने के बाद खुद भी इसे पीकर जान दे दी। पुलिस घटना की वजह पारिवारिक कलह बता रही है, लेकिन आर्थिक तंगी व उत्पीड़न की भी चर्चा रही। शव पोस्टमार्टम के लिए भेजकर पुलिस देर रात तक जांच में जुटी रही।
कंजासा निवासी सोमनाथ निषाद (45) पुत्र राममूरत निषाद चार भाइयों में बड़ा था। भाइयों में बंटवारा हो चुका है। शोभनाथ पत्नी सावित्री देवी, दो बेटियों तनिष्का (16) व साक्षी (8) और एक बेटे शेषनाथ (3) के साथ रहता था। यमुना में बालू निकासी का काम कर वह परिवार का भरण-पोषण करता था। इधर खनन पर रोक लगने के बाद से वह बेरोजगार हो गया था। इसकी वजह से आए दिन पत्नी से उसका विवाद होता था। सोमवार सुबह सोमनाथ काम की तलाश में कहीं गया था। दोपहर में वापस आकर उसने खाना खाया और फिर अहाते में बैठ गया। इस दौरान सावित्री तीन साल के बेटे शेषनाथ के साथ कमरे में जाकर सो गई। दोपहर दो बजे के करीब सोमनाथ ने बड़ी बेटी तनिष्का को 10 रुपये देकर चीनी व नींबू मंगाया और शरबत बनाया। फिर चुपके से इसमें जहरीला पदार्थ मिलाकर दोनों बेटियों को पिला दिया। इसके बाद खुद भी पी लिया। कुछ देर बाद तीनों की हालत बिगड़ने लगीं। उन्हें उल्टियां शुरू हो गईं। पत्नी की नींद खुली तो बाहर का नजारा देखकर उसके होश उड़ गए। वह चीखी तो अगल-बगल रहने वाले घर परिवार के लोग आ गए। तीनों को सीएचसी जसरा ले गए। जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। सूचना पर पहुंची पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। परिवार के साथ पूरे गांव में मातम छाया है।
पत्नी व बेटे को भी मारने की योजना में था
घूरपुर। सोमनाथ ने पत्नी और तीनों बच्चों के साथ आत्महत्या की योजना बनाई थी। संयोग था कि पत्नी सावित्री देवी तीन साल के बेटे को लेकर दूसरे कमरे में सोने चली गई। बेटियों को जहरीला शरबत पिलाने के बाद सोमनाथ ने उन दोनों को भी इसे पिलाने की कोशिश की, लेकिन वह नाकाम रहा। सावित्री ने बताया कि सोते वक्त सोमनाथ उसे व बेटे को जगाने आया था। वह शरबत पीने की बात कह रहा था, लेकिन नींद में होने के कारण उसने उसकी बात को अनसुनी कर दी, जिसके बाद वह चला गया। उधर, घटना के बारे में सुनकर लोगों के रोंगटे खड़े हो गए। जानकारी पर कुछ ही देर में घर के बाहर सैकड़ों की संख्या में ग्रामीण जमा हो गए। एक साथ पति व बेटियों को खोने वाली सावित्री गहरे सदमे में दिखी। वह उन्हें याद करते-करते बदहावास हो जा रही थी। उसकी बड़ी बेटी तनिष्का सातवीं और छोटी तीसरी कक्षा में पढ़ती थी।
लगाया उत्पीड़न का आरोप
घूरपुर। दो बेटियों को जहरीला शरबत पिलाकर मारने के बाद खुद आत्महत्या करने वाले सोमनाथ की पत्नी सावित्री देवी ने अपने देवरों पर संगीन आरोप लगाए हैं। सावित्री का आरोप है कि वह जिस घर में पति एवं बच्चों के साथ रहती है, उसे उसके देवर लोग खाली कराना चाहते हैं। इसी को लेकर आए दिन देवर उससे और उसके पति से झगड़ा करते थे, इसकी वजह से सोमनाथ बहुत परेशान था। सावित्री देवी का आरोप है कि उसी परेशानी से तंग आकर सोमनाथ ने दो बेटियों को मारने के बाद खुद आत्महत्या कर ली।
साइड स्टोरी
बालू खनन बंद होने से बेरोजगार हो जाते हैं हजारों परिवार
0 एक दर्जन गांवों में बसते हैं करीब 10 हजार बालू मजदूर
0 इस क्षेत्र के मजूदरों की आजीविका का मुख्य साधन है यमुना से बालू खनन
अमर उजाला ब्यूरो
घूरपुर। क्षेत्र के कंजासा गांव में आर्थिक तंगी की वजह से दो बेटियों को मारने के बाद खुद मौत को गले लगाने वाले शोभनाथ सरीखे तकरीबन दस हजार बालू मजदूर हैं। इसने सामने रोजी रोटी का एकमात्र साधन यमुना नदी में बालू खनन है। जब-जब इस इलाके में बालू खनन पर रोक लगी है, तब तब इन बालू मजदूरों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हुआ है और उनकी गृहस्थी तबाह हुई है। जिस पर शासन-प्रशासन की ओर से कोई ध्यान नहीं दिया जाता।
बता दें कि घूरपुर के कैनुआ, कंजासा, देवरिया, बीकर, मनकवार से लालापुर के अमिलिया, सेमरी, प्रतापपुर तक के करीब एक दर्जन ऐसे गांव हैं जहां बसने वाले अधिकांश परिवार बालू खनन के कार्य से जुड़े हैं। यहीं उनकी रोजी रोटी का एकमात्र सहारा है। बालू खनन से मिलने वाले मेहनताने से ही उनके घर परिवार का गुजर बसर होता है। इस इलाके में करीब 10ञ हजार बालू मजदूर है। जब-जब बालू खनन पर रोक लगती है या फिर शासन प्रशासन की तरफ से कार्रवाई होती है और बालू खनन का कार्य बंद होता है, तब तब इन 10 हजार बालू मजदूरों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो जाता है। जिससे कईयों का तो घर का खर्च तक नहीं चल पाता तो कई हताशा से घिर जाते हैं और गलत कदम उठा लेते हैं। चुंकि इधर बालू खनन पर एकदम रोक लग गई है, इसलिए इस समय भी सोमनाथ समेत हजारों मजदूर बेरोजगार होकर हताशा के शिकार हो गए हैं। कुछ लोग उसी हताशा को सोमनाथ की आत्महत्या को जोड़ रहे हैं।