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श्मशान घाटों-कब्रिस्तानों में बढ़ी शवों की तादाद, टूटा गमों का पहाड़

Fri, 23 Apr 2021 01:30 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

  • नहीं मिल रहे हैं चिताएं सजाने वाले, अब लोग खुद लगा रहे हैं चिता के लिए लकड़ियां
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prayagraj news : फाफामऊ घाट पर जलाए जा रहे शव। - फोटो : prayagraj
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विस्तार
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कोविड-19 से लगातार हो रही मौतों की वजह से श्मशान घाटों पर दिक्कतें पैदा हो गई हैं। अब दारागंज श्मशान घाट और फाफामऊ में चिता लगाने वालों का भी संकट पैदा हो गया है। ऐसे में दारागंज श्मशान घाट पर इंतजार की घड़ियां गिनते तमाम लोग खुद ही चिता लगाने के लिए मजबूर हो रहे हैं। श्मशान घाटों पर जगह भी नहीं मिल रही है। इसलिए लोगों को अपने शवों को जलाने के लिए बारी का इंतजार भी करना पड़ रहा है। इसी तरह कालाडांडा कब्रिस्तान में भी 20 से 25 शवों को प्रतिदिन सुपर्द-ए-खाक किया जा रहा है।

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prayagraj news : कोरोना संक्रमित मरीजों के लिए आक्सीजन सिलेंडर की बढ़ी मांग के कारण आपूर्ति करते डिलेवरीमैन। - फोटो : prayagraj
दारागंज श्मशान घाट पर बृहस्पतिवार को अंतिम संस्कार के लिए बारी का इंतजार करने में शवों को लेकर लोग घंटों प्रतीक्षा करते रहे। देर रात तक शवों को लाए जाने और चिता सजाने का सिलसिला जारी रहा। श्मशान घाट पर भीड़ लगने की वजह से पुलिस को कई बार सख्ती कर लोगों को हटाना पड़ा। बावजूद इसके गमगीन माहौल में लोग अपने शवों के अंतिम संस्कार के लिए जूझ रहे हैं। श्मशान घाटों पर शवों की संख्या बढ़ने से शवों की नियत स्थान के मानक मिट गए हैं।
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prayagraj news : कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामलों के दिनभर मरीजों को एसआरएन के कोविड सेंटर में भर्ती किया जा रहा हैं। - फोटो : prayagraj
एक चिता जलने से पहले ही बुझा कर दूसरी चिता लगा दी जा रही है। जिसे जहां जहां जगह मिल रही है, वहीं अंतिम संस्कार करवा रहा है। दारागंज श्मशान घाट पर अंतिम विदाई के लिए हफ्ते भर से मातम का मेला लग रहा है। हालांकि इस घाट पर कोविड संक्रमण से मरने वालों के शव नहीं लगाए जा रहे हैं, लेकिन अचानक शवों की तादाद बढ़ने से हर कोई हैरान है। कोरोना काल में श्मशान घाटों का दृश्य ऐसा होगा, यह कभी किसी ने सोचा नहीं था। दारागंज श्मशान घाट पर सोचकर रूह कांपने लगती है।

अंतिम संस्कार के लिए दो गज का फासला तक अब मयस्सर नहीं है। जलती चिताओं के बीच नई चिता सजाने के लिए जगह की तलाश स्वजनों के आंसू नहीं थमने दे रही है। दारागंज श्मशान घाट पर लकड़ी का काम करने वाले शिवम ने बताया कि बृहस्पतिवार को वहां 67 शवों का अंतिम संस्कार कराया गया। इसी तरह दो दिन पहले वहां सौ से अधिक शवों का अंतिम संस्कार कराया गया था। इसी श्मशान घाट पर काम करने वाले प्रशांत बताते हैं कि शवों की संख्या में इजाफा होने से मुखाग्नि के लिए दी जाने वाली आग से लेकर लकड़ी तक के मनमाना दाम वसूले जा रहे हैं। चिताएं लगाने वाले कम पड़ गए हैं। ऐसे में तमाम लोग अपने से चिता सजाने के लिए मजबूर हो रहे हैं।

बिना मास्क के श्मशान घाट पर भीड़ लगाने वालों को पुलिस ने खदेड़ा
प्रयाराज। दारागंज श्मशान घाट पर अंतिम संस्कार के लिए स्वजनों,रिश्तेदारों की भीड़ उमड़ने से सामाजिक दूरी के फर्क मिट गए। न दो गज की दूरी रही और न चेहरे पर माक्स ही लोगों के नजर आ रहा था। ऐसे में पुलिस को ऐसे लोगों को मास्क की अनिवार्यता समझाने के लिए वहां से तितर-बितर करना पड़ा। श्मशान घाट से लेकर सब्जी मंडी तक बिना मास्क भीड़ लगा रहे लोगों के खिलाफ पुलिस को सख्त रुख अपनाना पड़ा।

मुखाग्नि के लिए आग के भी दाम बढ़े
मुखाग्नि के लिए आग की भी कीमत बढ़ गई है। दारगंज श्मशान घाट पर अब अंतिम संस्कार के लिए पांच सौ से लेकर एक हजार रुपये तक सिर्फ आग देने के लिए लिए जा रहे हैं। पहले दो सौ रुपये में ही आग मिल जाया करती थी।
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