इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक सेवानिवृत्त सहायक अध्यापिका की सामान्य भविष्य निधि (जीपीएफ) का भुगतान ''कोष की अपर्याप्तता'' के आधार पर रोके जाने को लेकर नाराजगी व्यक्त की है। साथ ही कोर्ट ने निर्देश दिया कि वित्त एवं लेखा अधिकारी और जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी आगरा का वेतन तत्काल प्रभाव से तब तक के लिए रोक दिया जाए, जब तक कि याची के जीपीएफ राशि का ब्याज सहित भुगतान नहीं हो जाता। यह आदेश न्यायमूर्ति प्रकाश पाडिया की एकलपीठ ने मीना कुमारी शर्मा की याचिका पर दिया है।
याची 31 मार्च 2023 को सहायक अध्यापक के पद से सेवानिवृत्त हुई थी लेकिन उन्हें अभी तक जीपीएफ (37 लाख 27 हजार 9 सौ 66 रुपये) का भुगतान नहीं किया गया है। इसे लेकर उन्होंने इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की। न्यायालय ने पक्षों को सुनने के बाद पाया कि पर्याप्त धनराशि न होने के आधार पर जीपीएफ का भुगतान रोका गया है। इस पर कोर्ट ने कहा कि कानून स्पष्ट रूप से यह निर्धारित करता है कि जीपीएफ का भुगतान सेवानिवृत्त कर्मचारियों को तत्काल किया जाना चाहिए। मामले में कोर्ट ने संबंधित अधिकारियों का वेतन रोक दिया और उत्तर प्रदेश सरकार को निर्देश दिया कि दोनों संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध कार्यवाही शुरू करें।