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यमुना के घाटों का स्वरूप बिगाड़ने पर हाईकोर्ट सख्त

Fri, 21 Oct 2016 12:55 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो इलाहाबाद।
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डेमो पिक
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इलाहाबाद। मथुरा-वृंदावन में यमुना के घाटों का स्वरूप बिगाड़ने पर हाईकोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई है। घाटों को खोदकर सीवर पाइन लाइन बिछाने की शिकायत पर कोर्ट ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को भी आड़े हाथों लिया। बोर्ड को फटकार लगाते हुए कहा कि यमुना में गंदा पानी डालने की अनुमति किसी को भी नहीं दी जा सकती है। कोर्ट ने मथुरा विकास प्राधिकरण, नगर पालिका परिषद और प्रदेश सरकार से एक माह में जवाब मांगा है।
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मथुरा के महंत मधुमंगल सरन दास शुक्ला की जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायमूर्ति डीबी भोसले और न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा की पीठ ने उपरोक्त आदेश दिया। याचिका में कहा गया है कि मथुरा-वृंदावन में यमुना में प्रदूषण नियंत्रण का कोई कारगर उपाय नहीं किया जा रहा है। वहां के पौराणिक घाटों का स्वरूप बिगाड़ा जा रहा है जबकि पुरातत्व विभाग के निदेशक ने आदेश जारी करके घाटों का स्वरूप बिगाड़ने पर रोक लगाई है। जल निगम घाटों को खोदकर सीवर लाइन बिछा रहा है। सीवर का पानी बिना शोधन के सीधे यमुना में डाला जा रहा है। मथुरा में दो एसटीपी हैं मगर इनका उपयोग नहीं हो रहा है।
प्रदूषण बढ़ने के कारण और गलत योजनाएं लागू करने से यमुना घाटों से दूर हो रही हैं। कोर्ट ने कहा कि यमुना में प्रदूषित पानी डालने की अनुमति नहीं दी जा सकती है। प्रदेश सरकार को अगली सुनवाई के मौके पर बेहतर कार्ययोजना प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है ताकि यमुना को और प्रदूषित होने से बचाया जा सके। याचिका पर अगली सुनवाई 28 नवंबर को होगी।
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