इलाहाबाद हाईकोर्ट ने चार व्यक्तियों के पक्ष में किया गया वैध पट्टा उपमुख्यमंत्री को एक वकील की ओर से भेजे गए पत्र के आधार पर रद्द करने पर आश्चर्य जताया। कोर्ट ने संबंधित अधिकारियों को पट्टा तत्काल बहाल करने का निर्देश दिया है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने चार व्यक्तियों के पक्ष में किया गया वैध पट्टा उपमुख्यमंत्री को एक वकील की ओर से भेजे गए पत्र के आधार पर रद्द करने पर आश्चर्य जताया। कोर्ट ने संबंधित अधिकारियों को पट्टा तत्काल बहाल करने का निर्देश दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति रोहित रंजन अग्रवाल की पीठ ने राकेश और तीन अन्य की याचिका पर दिया।
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याची का कहना है कि भूमि प्रबंधन समिति की ओर से प्रस्ताव पारित होने के बाद 2013 में उन्हें भूमि का पट्टा प्रदान किया गया था। 2018 में फर्रुखाबाद के एक वकील की ओर से राज्य के उपमुख्यमंत्री को पत्र भेजे जाने के बाद पट्टा निरस्त करने की कार्यवाही शुरू की गई। उक्त पत्र के आधार पर उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता के तहत निरस्तीकरण की कार्यवाही शुरू की गई थी और पट्टा निरस्त कर दिया गया।
याची के अधिवक्ता ने दलील दी कि उप्र राजस्व संहिता के प्रावधानों के अनुसार, कलेक्टर को निर्धारित तरीके से जांच करने के बाद आवंटन और पट्टे को रद्द करने का अधिकार है। कोर्ट ने पाया कि राजस्व संहिता के प्रावधानों का पालन किए बिना पट्टा निरस्त कर दिया गया था। कोर्ट ने इसे राजस्व अधिकारियों की अंतर्निहित शक्तियों का उल्लंघन माना। कोर्ट ने मामले के तथ्यों और परिस्थितियों पर विचार करते हुए सात जनवरी, 2025 और 20 अक्तूबर 2024 के आदेशों को रद्द कर दिया।