हिंदुस्तान कॉलेज ऑफ साइंस की मान्यता निरस्त करने पर रोक
प्रयागराज। हाईकोर्ट ने आगरा के हिंदुस्तान कॉलेज ऑफ साइड एंड टेक्नालॉजी की मान्यता नामंजूर करने संबंधी एआईसीटीई के एक मई और 10 मई 2019 के आदेश पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने एआईसीटीई की इस दलील को नहीं माना कि 30 अप्रैल के बाद किसी संस्थान को मान्यता प्रदान नहीं की जा सकती है। अदालत का कहना था कि मान्यता देने में किसी प्रकार की अनियमितता होने पर हाईकोर्ट को उसमें सुधार का आदेश देने का अधिकार है। हिंदुस्तान कॉलेज की याचिका पर न्यायमूर्ति आरएसआर मौर्या और न्यायमूर्ति पीयूष अग्रवाल की पीठ ने सुनवाई की।
याची कॉलेज की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अनूप त्रिवेदी ने पक्ष रखा। एआईसीटीसी ने याची संस्था की ओर से प्रस्तुत मान्यता प्रार्थनापत्र में कई प्रकार की अनियमितता पाते हुए उसकी मान्यता वापस लेने का निर्णय लिया। एआईसीटीसी का कहना था कि कॉलेज की जमीन की रजिस्टर्ड डीड नहीं है। इस पर बने भवन का नक्शा जिला पंचायत से पास नहीं है। कॉलेज के पास निर्धारित संख्या में कंप्यूटर लैब, फैकेल्टी और अन्य आधारभूत सुविधाएं नहीं हैं। वह इंजीनियरिंग कॉलेज चलाने के मानक को पूरा नहीं करता है।
याची के अधिवक्ता का कहना था कि सेल डीड रजिस्टर्ड है और मूल दस्तावेज बैंक के पास बंधक हैं। कॉलेज में 300 के करीब शैक्षणिक और गैरशैक्षणिक कर्मचारी हैं तथा 1737 छात्र पढ़ रहे हैं। मान्यता वापस लेने से इनका भविष्य प्रभावित होगा। एआईसीटीई के अधिवक्ता ने सुप्रीमकोर्ट के पार्श्वनाथ चेरिटेबुल ट्रस्ट बनाम एआईसीटीई केस का हवाला देते हुए कहा कि सुप्रीमकोर्ट ने 30 अप्रैल के बाद मान्यता देने पर रोक लगाई है। मान्यता सिर्फ किसी वर्ष के 30 अप्रैल तक ही दी जा सकती है। कोर्ट का कहना था कि एआईसीटीई कॉलेज को 1996 से लगातार मान्यता देती आ रही है। सुप्रीमकोर्ट का आदेश मान्यता देने के लिए एक समयसीमा तय करना है, मगर इसमें ऐसा कोई निर्देश नहीं है कि मान्यता देने में अनियमितता को सुधारने के लिए हाईकोर्ट आदेश नहीं पारित कर सकता है।