इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बेसिक शिक्षा विभाग में वेतन मामले को लेकर कमेटी गठन की लेटलतीफी पर कड़ी नाराजगी जताई है। कोर्ट ने अपने ही आदेश के अनुपालन में देरी को लेकर शिक्षा निदेशक (बेसिक) उत्तर प्रदेश, लखनऊ से व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बेसिक शिक्षा विभाग में वेतन मामले को लेकर कमेटी गठन की लेटलतीफी पर कड़ी नाराजगी जताई है। कोर्ट ने अपने ही आदेश के अनुपालन में देरी को लेकर शिक्षा निदेशक (बेसिक) उत्तर प्रदेश, लखनऊ से व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है। कहा है कि अगली तारीख पर आदेश का अनुपालन न करने पर अतिरिक्त मुख्य सचिव, बेसिक शिक्षा को कोर्ट में उपस्थित होना पड़ेगा।
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यह आदेश न्यायमूर्ति मंजू रानी चौहान की पीठ ने नंदू प्रसाद की याचिका पर दिया। संत कबीर नगर निवासी नंदू प्रसाद 2001 में बेसिक विभाग में सहायक अध्यापक के पद पर जूनियर हाईस्कूल में नियुक्त हुए थे, लेकिन उनका वेतन नहीं बहाल हो सका। इसे उन्होंने हाईकोर्ट में चुनौती दी। कोर्ट ने 2023 में रिकॉर्ड तलब किया। इस दौरान कोर्ट ने पाया कि रिकॉड में नंदू के अप्रूवल लेटर का पन्ना गायब कर दिया गया है। इस पर कोर्ट ने 25 मई 2023 को कमेटी गठित कर मामले की जांच करने और रिपोर्ट न्यायालय में प्रस्तुत करने का आदेश दिया। कमेटी को 18 दिसंबर 2023 को रिपोर्ट प्रस्तुत करना था, लेकिन अभी तक न कमेटी गठित हुई और न जांच हो सकी।
16 जुलाई को स्थायी वकील ने कोर्ट के निर्देशों के अनुपालन के लिए एक महीने का अतिरिक्त समय मांगा। उन्होंने कोर्ट को बताया कि शिक्षा निदेशक (बेसिक) ने अतिरिक्त मुख्य सचिव, बेसिक शिक्षा को 14 जुलाई 2025 को ही आदेश के बारे में सूचित किया था। कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए कहा कि राज्य के इतने वरिष्ठ अधिकारी शिक्षा निदेशक (बेसिक) ने इस मामले पर दो साल से अधिक समय तक चुप्पी साधे रखी। कोर्ट के निर्देशों को अतिरिक्त मुख्य सचिव, बेसिक शिक्षा तक पहुंचाने में विफल रहे। इस पर कोर्ट ने शिक्षा निदेशक (बेसिक) को व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल करने का आदेश दिया है। अगली सुनवाई 25 अगस्त, 2025 को निर्धारित की गई है।