राजस्थान निवासी बाल अपचारी के खिलाफ कर्नलगंज थाने में दुष्कर्म के आरोप में मुकदमा दर्ज हुआ था। बचाव पक्ष की ओर से जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के चीफ डिफेंस कौंसिल ने तर्क दिया कि दोषी का कोई आपराधिक इतिहास नहीं है।
जिला अदालत ने नाबालिग से दुष्कर्म के बाल अपचारी को 10 साल कठोर कारावास और पांच हजार रुपये के अर्थ दंड से दंडित किया। यह आदेश अपर सत्र न्यायाधीश एवं विशेष न्यायाधीश, पॉक्सो एक्ट विनोद कुमार चौरसिया ने विशेष लोक अभियोजक पॉक्सो विनय कुमार त्रिपाठी को सुनकर दिया।
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राजस्थान निवासी बाल अपचारी के खिलाफ कर्नलगंज थाने में दुष्कर्म के आरोप में मुकदमा दर्ज हुआ था। बचाव पक्ष की ओर से जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के चीफ डिफेंस कौंसिल ने तर्क दिया कि दोषी का कोई आपराधिक इतिहास नहीं है। वह 23 साल का अविवाहित है। निर्धन परिवार से है और जेल में उसका आचरण संतोषजनक रहा है।
साथ ही न्यूनतम दंड और कम से कम अर्थदंड देने की मांग की गई। वहीं, राज्य की ओर से विशेष लोक अभियोजक ने कहा कि दोषी को कठोरतम दंड दिया जाना चाहिए। कोर्ट ने बाल अपचारी को दुष्कर्म का दोषी मानते हुए 10 साल के कठोर करावास की सजा सुनाई। साथ ही कोर्ट ने पीड़िता को राज्य की पीड़ित प्रतिकर योजना व अन्य प्रचलित निधियों से 50 हजार रुपये क्षतिपूर्ति देने का आदेश दिया है। वहीं, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को निर्देशित किया कि पीड़िता को यह प्रतिकर सुनिश्चित रूप से उपलब्ध कराया जाए।