भुवन की मदद से मैकेनिकल डिजाइन, इलेक्ट्रिकल, कंप्यूटर कोडिंग और विजन पर इस परियोजना से जुड़े 19 छात्रों की टीम ने काम किया। स्टीयरिंग अब चेन रहित बनाने में सफलता मिल गई है। इस टीम के मैकेनिकल हेड आयुष गौर हैं। इलेक्ट्रिकल के प्रभारी शशांक सिंह और कंप्यूटर विजन के हेड अनादि गर्ग हैं। पुरा छात्र सम्मेलन के दूसरे और आखिरी दिन दोपहर बाद एमएनएनआईटी के बहुउद्देश्यीय भवन परिसर से निकल कर दो सौ मीटर तक फर्राटा भरने के बाद इस मानव रहित कार को पूरी तरह सड़कों पर चलने के लिए फिट पाया गया।
अनादि गर्ग ने बताया कि इस कार का अब तीसरा और आखिरी चरण आरंभ होगा, जो छह महीने चलेगा। एमएनएनआईटी के प्रोफेसर समीर और प्रो. जितेंद्र गंगवार निर्देशन में बीटेक छात्रों की टीम ने मिलकर इस कार को तैयार किया है। इस कार के लिए फंडिंग और मार्गदर्शन एमएनएनआईटी के ही साल 1995 बैच के छात्र रहे आरआरडी गो क्रिएटिव के वाइस प्रेसीडेंट रोहित गर्ग और सड़क एवं परिवहन मंत्रालय नई दिल्ली में अधीक्षण अभियंता के पद पर तैनात राजेश कुमार ने किया है। कार्ट-95 के नाम से इस मानव रहित कार परियोजना पर 15 लाख रुपये लागत आई है।
अमेरिका की कार्निगी मेलॉन यूनिवर्सिटी की मदद से माव रहित कार की स्टीयरिंग और विजन की बाधाओं को दूर करने मेंम सफलता मिल गई है। इस कार को अब जहां भी जाने के लिए कोडिंग के माध्यम से कहा जाएगा, वहां वह अपने आप रास्ता ढूंढते हुए पहुंच जाएगी। - आयुष गौर, परियोजना के सिविल वर्क हेड।