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चिल्ड्रेन अस्पताल में बच्चों के लिए कोरोना ओपीडी

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सरोजनी नायडू बाल चिकित्सालय (चिल्ड्रेन) में बच्चों के लिए कोरोना ओपीडी शुरू की गई है। वार्ड नंबर चार को आइसोलेट कर 20 बेड का कोविड-19 वार्ड बनाया गया है। यहां मरीजों की जांच की जाएगी। संदिग्ध कोरोना पीड़ितों को डफरिन के आइसोलेट वार्ड में रिपोर्ट आने तक रखा जाएगा। रिपोर्ट पाजिटिव होने पर इलाज चिल्ड्रेन अस्पताल में किया जाएगा। बच्चों को कोरोना वायरस संक्रमण के बचाने के लिए चिल्ड्रेन अस्पताल में शुरू ओपीडी में पहले दिन एक भी मरीज नहीं आया। यहां एक महीने के लिए चार डॉक्टरों की ड्यूटी लगाई गई है। सभी को एक सप्ताह के रोटेशन पर कार्य करना होगा। साथ ही नर्सिंग और पैरामेडिकल स्टाफ भी तैनात किया गया है।
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योजना के मुताबिक कोविड ओपीडी में आने वाले बच्चों की स्क्रीनिंग की जाएगी। संक्रमित या संदिग्ध बच्चों को यहां से डफरिन अस्पताल में स्थापित आइसोलेटेड वार्ड में रखा जाएगा। जांच रिपोर्ट आने पर मरीजों का इलाज चिल्ड्रेन के कोविड वार्ड में की जाएगी। विभागाध्यक्ष बाल रोग विभाग डॉ. मुकेश बीर सिंह ने बताया कि शासन और प्राचार्य डॉ. एसपी सिंह के निर्देश पर कोविड ओपीडी शुरू कर वार्ड बनाया गया है। अभी यहां बच्चा मरीज नहीं आए हैं।
शासन ने कोरोना संक्रमित मरीजों की जांच और उपचार करने वाले चिकित्सा कर्मियों का 50 लाख का बीमा कराया है। ऐसे समय में नियमित नर्सिंग स्टाफ को न लगाकर आउटसोर्सिंग नर्सों की कोविड वार्ड और ओपीडी में तैनाती पर सवाल उठने लगे हैं। पदों के अनुरूप नियमित नर्सों की उपलब्धता के बावजूद कोरोना ड्यूटी में लगी आउटसोर्सिंग नर्सें सहमी हैं।
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चिल्ड्रेन अस्पतारल की ओपीडी और वार्ड में लगभग हर समय मारामारी की स्थिति रहती है। लॉक डाउन के दौरान यहां की ओपीडी लगभग खाली है। वार्डों में 50 से कम मरीज रह गए हैं। खाली अस्पताल में कोविड की जांच और उपचार की व्यवस्था होने पर भी मरीज लॉक डाउन के चलते यहां नहीं पहुंच पा रहे हैं।
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