कोरोना संक्रमण काल में निगेटिव रिपोर्ट वाले पोस्ट कोविड मरीजों की दुश्वारियां कम नहीं हो रही हैं। सौ में 99 फीसदी मरीजों में कमजोरी की
शिकायत आम है। अगर मरीज शुगर और बीपी से पीड़ित है तो दोनों में असंतुलन भी है। साथ ही सभी मरीजों में तनाव खतरनाक स्थिति में है। सेहत की चिंता आक्सीजन का स्तर भी घटा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि तनावमुक्त होकर पौष्टिक आहार का सेवन ही 70 उत्तम इलाज है। साथ ही चिकित्सक से परामर्श लेकर हल्की दवाएं और व्यायाम, प्राणायाम कर निजात पाई जा सकती है।
केस एक
सरोजनी नायडू बाल चिकित्सालय के अधीक्षक डॉ. मुकेश बीर सिंह कोविड ड्यूटी के दौरान संक्रमित हुए। होम आइसोलेशन में रहे, इलाज किया और रिपोर्ट निगेटिव आई। पांच दिन पहले वह चिल्ड्रेन अस्पताल पहुंचे। काम किया लेकिन कमजोरी बनी रही। दूसरे दिन फिर ड्यूटी पर गए तो राउंड के दौरान सीने में दर्द महसूस हुआ। एसआरएन के कॉर्डियोलॉजी विभाग के डॉ. राजपाल से संपर्क किया। तुरंत कुछ दवाएं लीं, आराम किया। डॉ. मुकेश बताते हैं कि लक्षण हार्टअटैक थे, सामान्य पोस्ट कोविड मरीजों में यही दिक्कत है। संक्रमित होने पर जो दवाएं दी गईं, उसके दुष्परिणाम के रूप में अन्य बीमारियां उभर रही हैं। शुगर, बीपी का असंतुलित होना सामान्य बात है। पोस्ट कोविड काल में चिकित्सक की सलाह बहुत जरूरी है।
केस दो
मीरापुर के संतोष तिवारी की कोविड रिपोर्ट दस दिन पहले निगेटिव आई। उन्हें हल्का बुखार, खांसी के साथ कभी-कभी सांस फूलने की शिकायत हुई। डॉक्टर से संपर्क किया तो उन्होंने सीटी स्कैन कराने की सलाह दी। रिपोर्ट में बताया गया कि फेफड़ों में संक्रमण बना है। पांच दिन बीते हैं, दवाओं से कुछ राहत है, लेकिन सावधानी बरतनी पड़ रही है। संतोष के मुताबिक दिमाग पर कोरोना हावी हो गया है। डॉक्टर की सलाह पर संगीत सुन रहे हैं, किताबें पढ़कर खाली समय व्यतीत कर रहे हैैं।
केस तीन
राजरूपपुर की सीमा सचदेवा 25 दिन पहले कोरोना संक्रमण से मुक्त हो चुकीं हैं। वह होम आइसोलेशन में रहीं। कमजोरी के साथ बीपी हाई है। कभी-कभी आंखों से पानी बहना और सिर दर्द की शिकायत ने चिंता बढ़ा दी। घबराहट भी काफी रही। निजी चिकित्सक से परामर्श लिया। बीपी की दवाएं बदलीं साथ में नसीहत मिली कि बीमारी के तनाव को दिमाग पर हावी न होने दें। पांच दिन बीते हैं, दवाओं के साथ एहतियात बरत रहीं हैं सो राहत मिलती दिख रही
भय, उलझन, घबराहट, अनिद्रा, उदासी है बड़ी परेशानी
पोस्ट कोविड मरीजों को फेफड़ों के संक्रमण के साथ भय, उलझन, घबराहट, अनिंद्र, उदासी जैसी अन्य परेशानियां घेर रही हैं। नकारात्मक विचार, अन्य मानसिक परेशानियों में घिरने से एक बीमारी ठीक होती है, दूसरी पनपने का कारण मिल रहा है। एमएलएन मेडिकल कॉलेज के मानसिक रोग विभाग के अध्यक्ष डॉ. वीके सिंह का कहना है कि कोरोना महामारी के कारण पोस्ट कोविड मरीजों में ही नहीं सामान्य लोगों में घातक रोग हो जाने का भय, आर्थिक संकट, घर से काम करना, दोस्तो-सहकर्मियों से न मिलना, बच्चों की पढ़ाई बाधित होने जैसी कई समस्याएं मानसिक समस्याओं का कारण बन रही हैं। ऐसे लोगों के लिए नि:शुल्क ऑनलाइन परामर्श की सुविधा है। जहां विशेषज्ञ समस्याओं का निदान ही नहीं करेंगे, जरूरी हुआ तो दवाओं के बारे में सलाह देंगे।
ई-संजीवनी एप है मात्र सहारा
कोरोना संक्रमण की पहली लहर में पोस्ट कोविड मरीजों के लिए शासन और स्वास्थ्य विभाग की ओर से कई व्यवस्थाएं की गई थीं। इस बार सप्ताह भर पहले ऑनलाइन परामर्श के लिए ई संजीवन सेवा शुरू की गई है। इसमें विशेषज्ञों का पैनल पंजीकरण कराने वाले मरीजों को न केवल परामर्श देगा बल्कि पर्चा भी देगा। जो मरीज की ओर से दर्ज कराए गए व्हाहट्स एप नंबर पर भेजा जाएगा।
पोस्ट कोविड मरीजों में कमजोरी, मांसपेशियों में दर्द, हल्के बुखार, तनाव, सीने में दर्द, लंग्स फाइब्रोसिस के साथ शुगर, बीपी का असंतुलित होने की शिकायते हैं। दिन भर में सौ से अधिक मरीज ऑनलाइन परामर्श ले रहे हैं। लोगों को सामान्य दवाओं के साथ कुछ जांचें कराने को कहा जाता है। बुखार की शिकायत होने पर सिर्फ पैरासीटामाल और अन्य बीमारियों के हिसाब से अलग-अलग दवाएं दी जाती है। शुगर, बीपी नियंत्रण पर विशेष जोर होता है। लोगों को जल्द स्वस्थ होने के लिए तनावमुक्त रहने की सलाह दी जा रही है।- डॉ. आशुतोष गुप्ता, छाती-फेफड़ा रोग विशेषज्ञ
कोरोना की दूसरी लहर में संक्रमणमुक्त होने वाले मरीजों की कठिनाइयां बढ़ी हैं। एंटीजन, आरटीपीसीआर जांच रिपोर्ट निगेटिव आने के बाद भी सांस फूलने, खांसी, एसपीओटू की कमी बनी रहने की शिकायतें आम हैं। अधिकतर पोस्ट कोविड मरीजों में स्मृति लोप और तनाव के लक्षण मिल रहे हैं। फेफड़ों की स्थिति जानने के लिए सीटी स्कैन कराने की जरूरत पड़ रही है। छाती में दर्द की शिकायत करने वालों खून पतला करने की दवा दी जाती है। पोस्ट कोविड मरीजों की दिक्कतें अलग-अलग है, दुश्वारियां इलाज के दौरान हुए इलाज के कारण होती हैं, जो दो से चार हफ्तों में दूर होती हैं, लेकिन ऑक्सीजन लेवल पर भी नजर रखने की जरूरत रहती है। - डॉ. आरएन पांडेय, फिजीशियन एसआरएन हॉस्पिटल