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कोरोना ने ले ली 50 से अधिक कर्मचारियों की जान, कर्मचारियों में दहशत का माहौल

Fri, 30 Apr 2021 01:33 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

  • एजी ऑफिस, विकास भवन, राजकीय मुद्रणालय समेत ज्यादातर विभागों के कर्मचारियों ने खो दिए साथी
  • कर्मचारियों में भय, नियमित सैनिटाइजेशन तथा अन्य सुविधाएं न होने से नाराजगी
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कोरोना - फोटो : PTI
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विस्तार
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कोरोना ने पचास से अधिक अफसरों और कर्मचारियों की जान ले ली है। विकास भवन, राजकीय मुद्रणालय, बैंक समेत ज्यादातर विभागों में कर्मचारियों ने अपने साथी खो दिए हैं। हर सुख-दुख में साथ खड़े रहने वाले नेताओं तथा युवा कर्मचारियों की मौत ने उन्हें झकझोर कर रख दिया है। 
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बीते दिनों कोविड की वजह से राजकीय मुद्रणालय के निदेशक अतुल कुमार श्रीवास्तव नहीं रहे। मुद्रणालय के शैलेंद्र सिंह, राम स्वरूप भी अब नहीं हैं। स्मार्ट सिटी के अकाउंटेंट की बुधवार को मौत हो गई। विकास भवन कर्मचारी महासंघ के अध्यक्ष नरसिंह की मौत ने तो कर्मचारियों को स्तब्ध कर दिया। विकास भवन के दो अन्य कर्मचारियों की भी कोविड से मौत हुई। बड़ी संख्या में कर्मचारियों के पॉजिटिव आने तथा निधन से बैंककर्मियों में भी भय व्याप्त है। अकेले इंडियन बैंक में ही अनुपम अग्रवाल, प्रदीप कुमार समेत तीन कर्मचारियों का निधन हो चुका है। 

एजी ऑफिस के शेषाद्रि शंकर पांडेय, आलोक यादव आदि कोविड का शिकार हो गए। इनके अलावा भी कई विभागों में अफसरों तथा कर्मचारियों का कोरोना की वजह से निधन हो चुका है। अफसरों और कर्मचारियों के निधन पर राज्य कर्मचारी महासंघ, सिविल ऑडिट एसोसिएशन आदि संगठनों ने शोक प्रकट किया है। और शोक संवेदनाओं का यह दौर थमने का नाम नहीं ले रहा राज्य कर्मचारी महासंघ की ओर से बृहस्पतिवार को भी साथियों के निधन पर श्रद्धांजलि अर्पित करने के साथ ही कर्मचारियों की सुरक्षा के सभी इंतजाम किए जाने की भी मांग की गई।
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चुनाव में ड्यूटी से नाराजगी
चुनाव में ड्यूटी से कर्मचारियों में काफी नाराजगी है। ज्यादातर कर्मचारियों की मतदान के बाद मतगणना में भी ड्यूटी लगाई गई है। संगठन के नेताओं का कहना है कि ड्यूटी तो लगा दी गई लेकिन कोविड प्रोटोकाल का कहीं पालन नहीं किया जा रहा। इससे संक्रमण का खतरा बन गया है। उन्होंने चुनावी ड्यूटी के दौरान पॉाजिटिव होने से मृतक कर्मचारियों के परिजनों को 50 लाख रुपये की आर्थिक मदद दिए जाने की मांग भी की है।

इलाज की सुविधा नहीं मिलने से गुस्सा
आपूर्ति विभाग में एक निरीक्षक कोविड पॉजिटिव थे। हालत बिगड़ने पर उन्हें अस्पताल में भर्ती कराने के लिए परिजनों को काफी भटकना पड़ा। काफी प्रयास के बाद अस्पताल में भर्ती तो किया गया लेकिन वेंटिलेटर नहीं मिल पाने से उनका निधन हो गया। एजी ऑफिस में असिस्टेंट सुपरवाइजर आलोक यादव की भी कोविड की वजह से मृत्यु हो गई। परिजनों तथा विभाग के अफसरों के अनुसार इन्हें भी समुचित इलाज नहीं मिल पाया। स्वरूपरानी से डिस्चार्ज होने के बाद वह दूसरे अस्पताल में भर्ती होने के लिए भटकते रहे। जबकि, संक्रमण काफी फैल चुका था। कई अन्य कर्मचारियों के इलाज में लापरवाही की बात भी सामने आई है।

वैक्सीन के लिए कतार से बचना चाह रहे कर्मचारी
चुनाव में ड्यूटी करने वाले 45 वर्ष से कम आयु के कर्मचारियों को कोविड का टीका नहीं लगाया गया। जबकि, उनकी तरफ से लगातार टीका लगाए जाने की मांग की जाती रही। हालांकि अब एक मई से 18 वर्ष से अधिक उम्र के सभी को टीका लगाने का आदेश जारी हुआ है। इसके लिए रजिस्ट्रेशन भी शुरू हो गया है। भीड़ तथा लाइन से बचने के लिए कर्मचारी विभाग में ही टीका लगवाए जाने की मांग कर रहे हैं। एसबीआई के अफसरों ने तो एक निजी अस्पताल से भी बात की है लेकिन इसके लिए सीएमओ की अनुमति चाहिए। बैंक के अफसरों का कहना है कि सीएमओ इसकी अनुमति नहीं दे रहे जबकि, वह खर्च देने के लिए भी तैयार हैं। उनका कहना है कि लखनऊ, वाराणसी समेत कई जिलों में शाखाओं में ही बैंककर्मियों को टीके लगाए जा रहे हैं।
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