कोरोना संक्रमण काल में कल-कारखानों से लेकर कुटीर उद्योगों तक पड़ी बंदी की मार से आयकर में बड़ी गिरावट आई है। इसकी वजह है उद्यमों और व्यवसायों पर तालाबंदी से आमदनी में कमी आना। आय न होने से जहां टैक्स जमा करने वालों में कमी आई है, वहीं करदाताओं के करोड़ों रुपये का रिफंड भी जारी हुआ है। इससे भी इनकम टैक्स पर असर पड़ने की बात कही जा रही है। हालांकि अब कोरोना कर्फ्यू खत्म होने के बाद आयकर में आई गिरावट दूर करने की कोशिशें तेज हो गई हैं। अफसरों ने जल्द ही इलाहाबाद परिक्षेत्र में आयकर में आई कमी दूर करने की उम्मीद जताई है।
उद्यमों पर तालाबंदी से आयकर पर व्यापक असर डाला है। इलाहाबाद परिक्षेत्र के कोरोना काल के पहले से अब तक के आंकड़े इस हकीकत को बयां करने के लिए काफी हैैं। वर्ष 2019-20 में जहां निगमीय कर 767.6 करोड़ वसूला गया था, वहीं आयकर की वसूली 6282.9 करोड़ रुपये हुई थी। तब इस परिक्षेत्र से कुल आयकर की धनराशि 7050 करोड़ रुपये पहुंचने से 3.5 प्रतिशत की वृद्धि दज4 की गई थी। लेकिन इसके बाद वष4 2020-21 में जहां निगमीय कर 909.6 करोड़ रहा, वहीं आयकर घटकर 6822.7 करोड़ पर आने से 3.2 प्रतिशत की गिरावट आ गई।
इसी तरह वित्तीय वर्ष 2019-2020 में एक अप्रैल से सात जून के बीच 757 करोड़ रुपये आयकर वसूली हुई थी। जबकि, वर्ष 2020-21 में कोरोना संक्रमण की पहली लहर में जब पूरे देश में संपूर्ण लॉकडाउन कर दिया गया था तब एक अप्रैल 2020 से सात जून 2020 तक सिर्फ 194.2 करोड़ रुपये ही आयकर की वसूली हो सकी। कोरोना की पहली लहर में 74.3 प्रतिशत की आयकर में गिरावट दर्ज की गई। हालांकि वित्तीय वर्ष 2021-22 में इसे भारी अंतर को पाटने की तेज कोशिशें की जा रही हैं। यही वजह है कि कोरोना कर्फ्यू के बावजूद चालू वित्तीय वर्ष में अब तक 472.2 करोड़ रुपये आयकर जमा कराया गया है।
इलाहाबाद परिक्षेत्र में आयकर में आई कमी को दूर करने का पूरा प्रयास किया जा रहा है। हम आयकर दाताओं को साथ लेकर इस अंतर को जल्द ही पूरा कर लेंगे। साधना शंकर, प्रभारी मुख्य आयकर आयुक्त, प्रयागराज परिक्षेत्र।