बजट मिले या न मिले, लेकिन पीसीएस प्रारंभिक परीक्षा की कॉपियां हर हाल में कैमरे के सामने ही खुलेंगी। उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग इस नई व्यवस्था को लागू करने के लिए पूरी तरह से तैयार है। हालांकि, परीक्षा प्रक्रिया में और अधिक पारदर्शिता लाने के लिए आयोग ने जो अन्य प्रस्ताव तैयार किए हैं, उन्हें लागू करने के लिए बजट की जरूरत पड़ेगी। प्रस्ताव शासन को भेजा जा चुका है और आयोग को अब बजट का इंतजार है।
सपा सरकार के कार्यकाल में उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग की ओर से आयोजित की गईं तमाम भर्ती परीक्षाओं पर धांधली के आरोप लगे। पीसीएस-2016 और आरओ एआरओ-2016 की परीक्षा का पेपर भी लीक हुआ। इसके अलावा कॉपियां बदले जाने के मामले सामने आए। केंद्रों के आवंटन में भी गड़बड़ी के आरोप लगे। प्रदेश में सरकार बदलने के बाद आयोग ने सुधार के लिए कई प्रस्ताव तैयार किए हैं। आयोग की योजना है कि केंद्रों में प्रश्नपत्रों की सील वीडियो कैमरे या सीसीटीवी कैमरे के सामने खोली जाए। इसके लिए आयोग ने तैयारी की है कि जहां सीसी टीवी कैमरे नहीं हैं, वहां प्रश्नपत्रों की सील वीडियो कैमरे के सामने खोली जाएगी।
इसके अलावा परीक्षार्थियों की पहचान सुनिश्चित करने के लिए बायौमैट्रिक मशीनें खरीदे जाने की योजना है। परीक्षा केंद्रों पर जैमर और गेट पर मेटल डिटेक्टर लगाए जाने की भी योजना है। इन योजनाओं को मूर्त रूप देने के लिए आयोग को बजट की जरूरत है, सो प्रस्ताव शासन को भेज दिया गया है। पीसीएस प्रारंभिक परीक्षा 24 सितंबर को प्रस्तावित है। आयोग को अब तक बजट नहीं मिला है। इस मामले में उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष अनुुरुद्ध यादव का कहना है कि कॉपियां तो हर हाल में कैमरे के सामने खोली जाएंगी। इसके लिए खास बजट की जरूरत नहीं है, सो आयोग अपने स्तर से यह इंतजाम कर लेगा। बाकी व्यवस्थाओं को लागू करने के लिए बजट की जरूरत पड़ेगी।