फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

पीसीएस-2014 की कॉपियां भी हुईं नष्ट

Thu, 15 Jun 2017 02:17 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
विज्ञापन
पीसीएस प्री का रिजल्ट
विज्ञापन
उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग फिर विवादों में घिर गया है। आयोग ने पीसीएस-2014 की कॉपियां भी नष्ट कर दी हैं। यह मामला तब सामने आया जब पीसीएस-2014 परीक्षा में शामिल हुए एक अभ्यर्थी ने अपनी कॉपी देखने के लिए आयोग में प्रत्यावेदन दिया। प्रतियोगी छात्रों का आरोप है कि आयोग ने कॉपियों को नष्ट करके भर्तियों में हुए घपले के सुबूत मिटाने की कोशिश की है। वहीं, आयोग के अफसरों का दावा है कि कॉपियां नियमों के तहत ही नष्ट की गईं।
विज्ञापन


पीसीएस-2014 की परीक्षा में शामिल हुए हिमांशु सिंह ने उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग में प्रत्यावेदन देकर अपनी उत्तर पुस्तिकाओं को देखने का अनुरोध किया था। हिमांशु को जनसूचना अधिकार के तहत आयोग की तरफ से बताया गया कि निर्धारित समय सीमा तक सुरक्षित रखे जाने के बाद उस परीक्षा की उत्तर पुस्तिकाओं को नष्ट कर दिया गया है। अब सवाल उठ रहे हैं कि मामला न्यायालय में लंबित है तो कॉपियों किस आधार पर नष्ट की गईं। साथ ही आयोग में हुई भर्तियों की सीबीआई जांच की मांग ने भी तेजी पकड़ रखी है। प्रतियोगी छात्रों का आरोप है कि आयोग ने सीबीआई जांच के भय से कॉपियों को नष्ट कर दिया। हालांकि  ऐसा ही एक मामला पहले भी सामने आया था। प्रतियोगी छात्र संघर्ष समिति के मीडिया प्रभारी ने 2012 की पीसीएस परीक्षा में अपनी उत्तर पुस्तिकाओं को देखने के लिए आयोग में आवेदन किया था। उस वक्त उन्हें भी आयोग ने यही बताया था कि कॉपियां नष्ट कर दी गई हैं। हालांकि इस मामले को लेकर बवाल हुआ तो आयोग बैकफुट पर आ गया और कहा कि सभी उत्तर पुस्तिकाएं सुरक्षित हैं। सिर्फ अवनीश की उत्तर पुस्तिका नहीं मिल रही है।

उस वक्त तक यही नियम था कि कॉपियां दस वर्ष तक सुरक्षित रखी जाएंगी और मामला अगर न्यायालय में लंबित है तो इससे अधिक समय तक कॉपियां सुरक्षित रखी जाएंगी लेकिन जुलाई 2013 में अनिल यादव के अध्यक्ष पद पर कार्यभार संभालने के बाद नियमों में संशोधन करते हुए कॉपियों को सुरक्षित रखे जाने की समय सीमा घटाकर एक वर्ष कर दी गई। हालांकि इस संशोधन का भी जबर्दस्त विरोध हुआ और आरोप लगे कि नियमों में संशोधन संविधान के खिलाफ है। मीडिया प्रभारी अवनीश पांडेय का कहना है कि 2011 से लेकर 2015 तक सभी पीसीएस परीक्षाओं, ओअर 2009, 2013, 2015, यूडीए-एलडीए 2011, 2013, 2015 समेत कई परीक्षाओं से जुड़े मामले न्यायालय में लंबित हैं। आयोग की ओर से कई गई भर्तियों की सीबीआई जांच की मांग भी हो रही है। ऐसे में कॉपियों को नष्ट करना भर्तियों में हुए घपलों के सुबूत मिटाने जैसा है। उधर, उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष अनुरुद्ध यादव का कहना है कि कॉपियों को नियमों के तहत ही नष्ट किया गया।
विज्ञापन


सुहासिनी बाजपेयी के मामले में उत्तर पुस्तिकाओं ने ही आयोग में हुई गड़बड़ी की पोल खोली थी। सुहासिनी 2015 की पीसीएस-परीक्षा में शामिल हुईं थीं। मुख्य परीक्षा में सफलता न मिलने पर सुहासिनी को आशंका की हुई उनकी कॉपी से छेड़छाड़ हुई है। सुहासिनी के प्रत्यावेदन पर उत्तर पुस्तिका की दोबारा जांच कराई तो पता चला कि उनकी कॉपी ही बदल दी गई। जांच के बाद सुहासिनी को पीसीएस मुख्य परीक्षा में उत्तीर्ण किया गया। साथ ही आयोग ने मामले में अपने कुछ कर्मचारियों के खिलाफ भी कार्रवाई की। अगर उस वक्त 2015 की कॉपियां भी नष्ट कर दी गईं होतीं तो गड़बड़ी कभी सामने नहीं आती। प्रतियोगियों का आरोप है कि ऐसी ही गड़बड़ी कई दूसरे कॉपियों के साथ भी होने की आशंका।
विज्ञापन
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें