हाईकोर्ट ने अवमानना में सजा पाए और दर्जनों मुकदमों की क्रिमिनल हिस्ट्री होने के आधार पर अधिवक्ता को जिला अधिवक्ता संघ का चुनाव लड़ने से रोक दिया है। कोर्ट ने कहा कि ऐसा व्यक्ति अधिवक्ता संघ ही नहीं किसी भी प्रकार का चुनाव लड़ने के योग्य नहीं है। गोरखपुर के राजेंद्र कुमार गिरी की याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति वीके शुक्ल और न्यायमूर्ति एमसी त्रिपाठी की खंडपीठ ने गोरखपुर जिला अधिवक्ता संघ की एल्डर कमेटी को निर्देश दिया है कि वह चुनाव शीघ्र कराएं।
याची के अधिवक्ता विभू राय ने बताया कि गोरखपुर अधिवक्ता संघ के पूर्व मंत्री भानु प्रताप पांडेय के खिलाफ 2013 में प्रधान न्यायाधीश परिवार न्यायालय ने अवमानना का रेफरेंस हाईकोर्ट भेजा था। हाईकोर्ट ने 2015 में भानु को अवमानना का दोषी करार देते हुए चार महीने के लिए वकालत पर रोक लगा दी तथा दो हजार रुपये का जुर्माना लगाया। इसके खिलाफ उन्होंने सुप्रीमकोर्ट में अपील दाखिल की। सुप्रीमकोर्ट ने जुर्माने की सजा माफ कर दी मगर वकालत पर प्रतिबंध अगले आदेश तक के लिए बढ़ा दिया। इसके बावजूद भानु प्रताप ने वर्ष 2015 के अधिवक्ता संघ चुनाव में मंत्री पद के लिए नामांकन कर दिया। एल्डर कमेटी पर दबाव बनाकर नामांकन पत्र भी स्वीकार करवा लिया। याची ने इसकी शिकायत यूपी बार कौंसिल से की। बार कौंसिल ने भानु प्रताप को चुनाव लड़ने के अयोग्य करार देते हुए नामांकन पर रोक लगा दी। इसके खिलाफ बार कौंसिल ऑफ इंडिया में अपील दाखिल की गई। बार कौंसिल ऑफ इंडिया ने यूपी बार कौंसिल का आदेश एक पक्षीय होने के आधार पर रोक लगा दी।
इसे हाईकोर्ट में चुनौती दी गई। अधिवक्ता ने तर्क दिया कि भानु प्रताप अवमानना में सजायाफ्ता हैं। हाईकोर्ट और सुप्रीमकोर्ट ने उनके कार्यों पर कठोर टिप्पणियां की हैं। उनके खिलाफ 20 आपराधिक मुकदमों की क्रिमिनल हिस्ट्री है। जिले के गैंग चार्ट में भी नाम है। हाईकोर्ट ने भानु प्रताप को चुनाव लड़ने से रोकते हुए एल्डर कमेटी को निर्देश दिया है कि अधिवक्ता संघ का चुनाव शीघ्रता से कराया जाए।