आरओ/एआरओ परीक्षा में चयन के पैमाने पर विवाद
टाइप टेस्ट के लिए अयोग्य ठहराए गए अभ्यर्थियों ने दर्ज कराई आपत्ति
यूपीपीएससी पर मनमानी का आरोप, कोर्ट जाने की तैयारी में अभ्यर्थी
प्रयागराज। समीक्षा अधिकारी (आरओ)/सहायक समीक्षा अधिकारी (एआरओ) परीक्षा-2017 को लेकर नया विवाद सामने आया है। एआरओ के टाइप टेस्ट में शामिल होने से बड़े पैमाने पर अभ्यर्थी वंचित हो रहे हैं। उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग ने इन अभ्यर्थियों को अयोग्य ठहरा दिया है, जबकि अभ्यर्थियों का दावा है कि वे टाइप टेस्ट में शामिल होने के लिए अर्हता रखते हैं, लेकिन आयोग मनमानी पर उतारू है और उसने अपने हिसाब से चयन का पैमाना तय कर लिया है। आयोग अध्यक्ष से मुलाकात के दौरान उचित आश्वासन न मिलने पर अभ्यर्थी अब न्यायालय जाने की तैयारी में हैं।
अभ्यर्थी रोहित सिंह, अखिलेश यादव, सुरभि मिश्रा, अरविंद कुमार सिंह का कहना है कि 2014 की एआरओ परीक्षा में उच्च डिग्री धारकों का चयन हुआ था। कंप्यूटर साइंस, बीटेक डिग्री वालों को भी टाइप टेस्ट में शामिल किया गया था, लेकिन इस बार एआरओ टाइप टेस्ट से इन अभ्यर्थियों को बाहर कर दिया गया। केवल कुछ गिनेचुने संस्थानों से डोएक का ‘ओ’ लेवल प्रमाणपत्र और पीजीडीसीए वालों को टाइप टेस्ट में शामिल होने का मौका दिया गया है। आयोग ने टाइप टेस्ट के लिए 817 अभ्यर्थियों को अर्ह पाया है।
इस मसले पर पिछले सप्ताह अभ्यर्थियों ने आयोग अध्यक्ष से मुलाकात की थी। अभ्यर्थियों के मुताबिक अध्यक्ष ने कहा कि इस मामले में कुछ नहीं किया जा सकता। अभ्यर्थियों ने आयोग के अध्यक्ष के समक्ष 2014 की एआरओ परीक्षा का उदाहरण भी दिया, लेकिन उन्होंने इस पर कोई ध्यान नहीं दिया। अभ्यर्थियों का कहना है कि अगर यही करना था तो मुख्य परीक्षा से पहले ही स्थिति स्पष्ट कर देनी चाहिए थी, क्योंकि अभ्यर्थियों ने उसी वक्त प्रमाणपत्र दे दिए थे। अभ्यर्थियों का कहना है कि वे इस मामले में न्यायालय की शरण में जाएंगे। उधर, आयोग के सचिव जगदीश का कहना है कि प्रक्रिया नियमानुसार हुई है और अर्ह अभ्यर्थियों को ही टाइप टेस्ट के लिए मौका दिया गया है।