prayagraj news : इलाहाबाद विश्वविद्यालय।
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इलाहाबाद विश्ववविद्यालय (इविवि) में शारीरिक शिक्षा विभाग की बोर्ड ऑफ स्टडीज की बैठक को लेकर विवाद हो गया है। विभाग के एक प्रोफेसर का आरोप है कि बैठक हुई ही नहीं और विभागाध्यक्ष ने कागज पर दिखा दिया कि बैठक हुई। साथ ही इसकी आड़ में कई महत्वपूर्ण निर्णय भी ले लिए। वहीं, इविवि प्रशासन ने प्रोफेसर के आरोपों को निराधार बताते हुए दावा किया है कि बैठक हुई थी और बैठक की कार्यवृत्ति में सभी सदस्यों के हस्ताक्षर भी हैं।
शारीरिक शिक्षा विभाग के प्रो. डीसी लाल ने डीन कला संकाय को पत्र लिखकर बताया है कि 25 मार्च को बोर्ड ऑफ स्टडीज की बैठक प्रस्तावित थी, लेकिन यह बैठक नहीं हो सकी। यह बात तब सामने आई जब 10/11 जून को प्रस्तावित फैकल्टी बोर्ड कला संकाय की बैठक का एजेंडा प्राप्त हुआ, जिसमें 25 मार्च की बैठक का उल्लेख भी किया गया है। प्रो. डीसी लाल का दावा है कि ज्यादातर सदस्यों के उपस्थित न होने के कारण बैठक नहीं हो सकी थी। उनका आरोप है कि बैठक न होने के बावजूद विभागाध्यक्ष ने कागज में बैठक दिखा दी और फर्जी तरीके से शारीरिक शिक्षा विभाग के पीएचडी के परीक्षक तय कर लिए।
इसके अलावा शारीरिक शिक्षा विभाग के बोर्ड ऑफ स्टडीज में दो बाह्य सदस्यों को फर्जी तरीके से नियुक्त कर लिया गया, जबकि नियमानुसार बैठक में उनकी नियुक्ति होनी चाहिए थी। प्रो. लाल ने मांग की है कि बोर्ड ऑफ स्टडीज के दो बाह्य सदस्यों की नियुक्ति को न माना जाए। इस बारे में इविवि की पीआरओ डॉ. जया कपूर का कहना है कि शारीरिक शिक्षा की विभागाध्यक्ष ने बैठक होने की पुष्टि की है। साथ ही बताया है कि बैठक की कार्यवृत्ति में सभी सदस्यों के हस्ताक्षर भी हैं।