हाईकोर्ट में मुकदमे की लिस्टिंग को लेकर सोशल मीडिया पर टिप्पणी करने के मामले में हाईकोर्ट ने स्वत: संज्ञान लेते हुए अवमानना की कार्यवाही प्रारंभ की है। हाईकोर्ट बार के पूर्व उपाध्यक्ष आचार्य राजेश त्रिपाठी के खिलाफ मंगलवार को अवमानना का मामला मुख्य न्यायमूर्ति गोविंद माथुर और न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा की बेंच में लगा था। हालांकि इस मामले में न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा के खुद को सुनवाई से अलग कर लेने के कारण मामले को नई पीठ के समक्ष नामित करने का आदेश दिया गया है।
राजेश त्रिपाठी ने गत 13 मई को हाईकोर्ट में सूचीबद्ध एक मुकदमे को लेकर सोशल मीडिया पर टिप्पणी की थी। मुकदमे में हाईकोर्ट के एक वरिष्ठ अधिवक्ता का भी नाम था। उन्होंने कहा था कि आम अधिवक्ता अपने फ्रेश मुकदमों की सुनवाई को लेकर परेशान हैं और यहां 2019 का मुकदमा लिस्ट होकर सुना जा रहा है। इतिहास सेटिंग से बदला है। वहीं दूसरी ओर वरिष्ठ अधिवक्ता का कहना है कि इस टिप्पणी के बाद दर्जनों ऐसे कमेंट आए जिनमें उनके बारे और लिस्टिंग को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणियां की गईं थीं। मौजूदा समय में वह उस मुकदमे में वकील भी नहीं है और न ही उन्होंने मुकदमा लिस्ट कराया था। इसकी शिकायत हाईकोर्ट प्रशासन से की गई थी, जिस पर यह कार्यवाही हुई है।