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उपभोक्ता आयोग : पासपोर्ट गुम होने से ऑस्ट्रेलिया में हनीमून का टूर रद्द, कोरियर कंपनी पर हर्जाना

Mon, 18 Nov 2024 05:25 AM IST
विनोद सिंह अमित गुप्ता, अमर उजाला नेटवर्क प्रयागराज

सार

मोतीलाल नेहरू रोड निवासी युवती की शादी नौ फरवरी 2014 को हुई थी। ऑस्ट्रेलिया के सिडनी में 21 फरवरी को हनीमून का टूर था। उसने सात फरवरी को सिविल लाइंस, प्रयागराज के सिद्धि विनायक बिल्डिंग स्थित ब्लू डार्ट एक्सप्रेस कोरियर डाक से पासपोर्ट व वीजा बनाने के लिए नई दिल्ली के राजौरी गार्डन में भेजा।
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अदालत का आदेश - फोटो : istock
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विस्तार
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ब्लू डार्ट एक्सप्रेस कोरियर कंपनी से पासपोर्ट गुम होने पर नवविवाहिता का ऑस्ट्रेलिया का हनीमून टूर रद्द हो गया। इस पर जिला उपभोक्ता आयोग ने कंपनी पर केस फाइल करने की तिथि से 5910 रुपये पर आठ फीसदी ब्याज संग पीड़िता को भुगतान करने का आदेश दिया है।

 

मोतीलाल नेहरू रोड निवासी युवती की शादी नौ फरवरी 2014 को हुई थी। ऑस्ट्रेलिया के सिडनी में 21 फरवरी को हनीमून का टूर था। उसने सात फरवरी को सिविल लाइंस, प्रयागराज के सिद्धि विनायक बिल्डिंग स्थित ब्लू डार्ट एक्सप्रेस कोरियर डाक से पासपोर्ट व वीजा बनाने के लिए नई दिल्ली के राजौरी गार्डन में भेजा। इसके लिए 500 रुपये सर्विस फीस के अलावा 410 रुपये अतिरिक्त चार्ज लिए गए। लेकिन, कोरियर उक्त पते पर नहीं पहुंचा। कंपनी से डाक के बारे में पूछने पर भी सही जानकारी नहीं मिली।

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18 फरवरी को कंपनी ने उसे बताया कि उक्त डाक की डिलीवरी गलत जगह पर हो गई। हालांकि, इसके बावजूद पासपोर्ट नहीं मिला। इसके चलते उसका ऑस्ट्रेलिया का टूर रद्द हो गया। इस दौरान टिकट आदि समेत पर उसके चार लाख खर्च हुए थे।

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दो माह में दें हर्जाना

आयोग के अध्यक्ष मो.इब्राहिम, सदस्य प्रकाश चंद्र त्रिपाठी की बेंच ने सिविल लाइंस सिद्धि विनायक बिल्डिंग स्थित ब्लू डार्ट एक्सप्रेस लिमिटेड के प्रबंधक और लखनऊ-फैजाबाद रोड स्थित इंदिरानगर के ब्लू डार्ट एक्सप्रेस लि.के महाप्रबंधक के विरुद्ध 10 साल बाद फैसला सुनाया। आदेश दिया है कि दो माह में 910 रुपये मुआवजा और कोरियर डाक खोने की क्षति के रूप में 5000 (कुल 5910 रुपये) आठ फीसदी संग केस फाइल करने की तिथि से पीड़िता को भुगतान करें।

10 साल बाद सुनाया फैसला

पीड़िता ने 11 अप्रैल 2014 को जिला उपभोक्ता आयोग में केस फाइल किया था। आयोग ने 10 साल बाद केस में फैसला सुनाया। साथ ही आयोग ने यह भी सुनिश्चित किया कि मानसिक क्षतिपूर्ति के रूप में 5,000 रुपये और वाद खर्च के लिए 2,000 रुपये अतिरिक्त अदा करना होगा। वहीं, कंपनी ने पीड़िता की मांग को गलत ठहराया है।

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