इलाहाबाद हाईकोर्ट के लाइब्रेरी हॉल में आयोजित कार्यक्रम में मुख्य न्यायाधीश को सम्मानित किया गया।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश अरुण भंसाली ने कहा कि भारतीय संविधान महज एक दस्तावेज नहीं, बल्कि समाज के अंतिम व्यक्ति के लिए न्याय की उम्मीद, अधिकार और दायित्वों का मार्गदर्शक भी है। मुख्य न्यायाधीश संविधान दिवस पर हाईकोर्ट बार एसोसिएशन की ओर से लाइब्रेरी हॉल में समारोह को बतौर संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि संविधान की रचना इस प्रकार की गई है कि न्याय की प्रतीक्षा कर रहे अंतिम व्यक्ति तक न्याय सहज रूप से पहुंच सके।
विशिष्ट अतिथि न्यायमूर्ति मनोज कुमार गुप्ता ने कहा संविधान न्यायिक प्रणाली की रीढ़ है। यह हमें समाज के प्रति उत्तरदायित्व का भी स्मरण कराता है। न्यायमूर्ति महेश चंद्र त्रिपाठी ने संविधान को न्याय और दायित्व का संतुलन स्थापित करने वाला मार्गदर्शक बताया।
अध्यक्षता बार एसोसिएशन के अध्यक्ष राकेश पांडे और संचालन सचिव अखिलेश कुमार शर्मा ने किया। इस दौरान कमलेश कुमार द्विवेदी, अमित कुमार सिंह, विवेक मिश्र, राज कुमार त्रिपाठी, हनुमान प्रसाद मिश्र, दिनेश वरुण रहे।
अधिवक्ता परिषद काशी की ओर से केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (कैट) में भी संविधान दिवस पर कार्यक्रम आयोजित किया गया। मुख्य अतिथि न्यायमूर्ति अनीश कुमार गुप्ता ने कहा कि स्वतंत्रता, समानता और भ्रातृत्व संविधान की मूल आत्मा हैं। भ्रातृत्व के बिना स्वतंत्रता और समानता का अस्तित्व अधूरा है। उन्होंने कहा कि कानून का दुरुपयोग रोकने की पहली जिम्मेदारी अधिवक्ता पर होती है। इस दौरान कैट के विभागाध्यक्ष न्यायमूर्ति ओम प्रकाश और सदस्य रजनीश राय, अपर महाधिवक्ता संजीव सिंह, मोहन प्यारे, अंजनी नंदन, ओपी गुप्ता रहे।
एडवोकेट्स एसोसिएशन की ओर से आयोजित समारोह में मुख्य अतिथि न्यायमूर्ति अजय भनोट ने कहा कि संविधान जनमानस की मूल भावनाओं का समान रूप से संरक्षण करता है। अध्यक्षता एसोसिएशन के अध्यक्ष वरिष्ठ अधिवक्ता सगीर अहमद व संचालन महासचिव ईशान देव गिरि ने किया। इस दौरान प्रदीप कुमार, देश रतन चौधरी (संस्थापक सदस्य), विक्रांत राणा, अमित कृष्ण रहे।