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सांस्कृतिक केंद्र शिल्प मेला02

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प्रयागराज। शिल्प और स्वाद के संगम के साथ सांस्कृतिक केंद्र में आरंभ दस दिनी राष्ट्रीय शिल्प मेले के दूसरे दिन सोमवार को मुक्ताकाशी मंच लोक और शास्त्रीय का संगम लोगों को सम्मोहित करता रहा। निर्गुण गायक यज्ञ नारायण पटेल के भजनों से शुरुआत के बाद ओडिसी नर्तक पं.केलू चरण महापात्रा एवं रतिकांत महापात्रा की शिष्या पियाली घोष ने ओडिसी नृत्य की प्रस्तुति से समा बांधा। अद्भुत आंगिक अभिनय से वंदना व ताल-तान के मिश्रण से ‘पल्लवी’ की प्रस्तुति से उन्होंने दर्शकों से नाता जोड़ा। जबलपुर की गायिका शहनाज़ अख्तर ने भजनों से दर्शकों से नाता जोड़ा। गणेश वंदना के बाद भजन ‘मुझे चढ़ गया भगवा रंग, भोले हो गये टनाटन, छुम-छुम चन नन बाजे पायजनिया, के गायन से श्रोताओं को भाव विभोर किया।
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पूर्वोत्तर के लोकरंग, गुजरात के समुद्रतटीय इलाके के आदिवासी सिद्धि गोमा मुस्लिम समुदाय के जनजातीय नृत्य ‘सिद्धी धमाल’, राजस्थान की युवतियों का मांगलिक व खुशी के अवसरों पर होने वाला चरी व चकरी नृत्य, संतुलन का प्रतीक पूर्वोत्तर के मणिपुर का स्टिक डांस, वैष्णव धर्म के प्रति आस्था का प्रतीक पुंग चोलम, दोआबा क्षेत्र के पारंपरिक नृत्य ढे़िड़या, असमी लोकजीवन की छाप ‘बिहू नृत्य’, उड़ीसा के गोटीपुआ नृत्यों की प्रस्तुतियों ने भारतीय संस्कृति की विविधता से जोड़ा।
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