उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपीपीएससी) में भर्ती परीक्षाओं की स्थिति समीक्षा अधिकारी (आरओ)/सहायक समीक्षा अधिकारी (एआरओ) भर्ती प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही ठीक हो सकेगी। आयोग की परीक्षाओं के संचालन का मुख्य जिम्मा एआरओ एवं आरओ पर ही होता है। हालत यह कि आयोग में एआरओ के सभी पद खाली पड़ हैं और आरओ के भी आधे से अधिक पदों पर भर्ती का इंतजार है।
आरओ/एआरओ परीक्षा-2016 विवादों में फंसी है। प्रारंभिक परीक्षा का पेपर व्हाट्स एप पर वायरल होने के मामले में मुकदमा भी दर्ज है और सीबीसीआईडी इसकी जांच कर रही है। अभ्यर्थी लगातार मांग कर रहे हैं कि मामले का हल नहीं निकल पा रहा है तो परीक्षा निरस्त की जाए और नए सिरे से परीक्षा का आयोजन किया जाए ताकि रिक्त पदों पर भर्तियां हो सकें। इसके अलावा अभ्यर्थियों को आरओ/एआरओ-2017 की मुख्य परीक्षा के परिणाम का भी इंतजार है।
आरओ/एआरओ 2017 की प्रारंभिक परीक्षा आठ अप्रैल को आयोजित की गई थी।
आयोग ने पिछले साल 14 दिसंबर को परीक्षा का परिणाम घोषित कर दिया। इसमें 15342 अभ्यर्थियों को सफल घोषित किया गया। परीक्षा के जब विज्ञापन जारी किया गया था, उस वक्त पदों की संख्या 465 थी लेकिन प्रारंभिक परीक्षा का परिणाम घोषित होने तक पदों की संख्या बढ़कर 809 हो गई। अब इतने ही पदों पर भर्ती होनी है। मुख्य परीक्षा का आयोजन कराया जा चुका है। अभ्यर्थियों को परिणाम का इंतजार है।
मुख्य परीक्षा का परिणाम आने के साथ ही आरओ पद के लिए आवेदन करने वाले अभ्यर्थियों का अंतिम चयन हो जाएगा और एआरओ पद के लिए आवेदन करने वाले अभ्यर्थियों को इसके बाद टाइप टेस्ट देना होगा। 809 पदों पर भर्ती प्रक्रिया पूरी होने के बाद आयोग में भी एआरओ के रिक्त पड़े तकरीबन सभी 100 पद भरे जा सकेंगे और आरओ के भी रिक्त पड़े आधे पदों पर भी नियुक्तियां हो सकेंगी। ऐसे में आयोग की ओर से संचालित परीक्षाएं पटरी पर आ सकेंगी और स्थिति में सुधार होगा।