सरकार की अंग्रेजी ने फंसा दिया सिपाही भर्ती में पेच 0 उत्तर प्रदेश की सरकारी भाषा हिंदी, नियमावली में अंग्रेजी में किया संशोधन योगेंद्र मिश्र इलाहाबाद। सिविल पुलिस में 35 हजार कांस्टेबलों की भर्ती बिना लिखित परीक्षा के करने के प्रदेश सरकार के मंसूबे पर उसकी अंग्रेजी ही पानी फेर सकती है। फिलहाल नियमावली में अंग्रेजी भाषा में किए गए संशोधन ने गंभीर कानूनी अड़चन पैदा कर दी है। पुलिस कांस्टेबलों की सीधी भर्ती के लिए सरकार द्वारा सिविल पुलिस (कांस्टेबल और हेड कांस्टेबल सर्विस) रूल्स 2008 में संशोधन कर दो दिसंबर 2015 नई नियमावली लाई गई।
नई नियमावली में 2008 की नियमावली के प्रारंभिक और मुख्य लिखित परीक्षा कराने के प्रावधानों को समाप्त कर दिया गया। नए नियम में भर्ती सिर्फ शारीरिक परीक्षा और हाईस्कूल तथा इंटरमीडिएट के प्राप्तांकों के आधार पर तैयार मेरिट द्वारा होनी है। नई नियमावली जारी करते हुए प्रदेश सरकार ने कहा कि पुराने सभी नियमों और आदेशों का अतिक्रमण करते हुए नई नियमावली जारी की जा रही है। इसके लिए अंग्रेजी के ‘सप्रेशन (suppression)’ शब्द का इस्तेमाल किया गया, मगर हिंदी में अधिसूचना जारी करते समय ‘सप्रेेशन’ के लिए हिंदी का कोई शब्द उपयोग नहीं हुआ।
इस मामले को लेकर दाखिल याचिका में वकीलों की मुख्य बहस यही है कि अधिसूचना में सरकार ने पुराने-नियमों और आदेशों का अतिक्रमण नहीं किया है जो कि अंग्रेजी में जारी अधिसूचना में ‘सप्रेेशन’ शब्द से आता है। चूंकि उत्तर प्रदेश की सरकारी भाषा हिंदी है, इसलिए हिंदी में जारी अधिसूचना ही मान्य होगी। फिलहाल हिंदी की अधिसूचना से 2008 की नियमावली समाप्त नहीं होती है। प्रदेश सरकार ने सिपाही भर्ती का विज्ञापन 29 दिसंबर 2015 को जारी किया था, जबकि 17 फरवरी 2016 को खंडन प्रकाशित करते हुए उसमें शब्द जोड़ा कि ‘पुराने सभी नियमों और आदेशों का अतिक्रमण करते हुए नई नियमावली घोषित की जाती है।
’ वकीलों की दलील है कि सरकार ने खंडन विज्ञापन प्रकाशित होने के बाद जारी किया है इसलिए मौजूदा भर्ती 2008 की नियमावली के तहत ही होनी चाहिए। यह भी दलील दी गई है कि लिखित परीक्षाएं आयोजित करने से विभाग के पास योग्यतम अभ्यर्थियों के बीच चुनाव करने का अवसर होता है चूंकि कांस्टेबल और हेडकांस्टेबल का पद पुलिस विभाग में काफी महत्वपूर्ण होता है, इसलिए चयन से लिखित परीक्षा समाप्त करना योग्यता से समझौता करना होगा। इस मामले में लंबित सभी याचिकाओं पर फिलहाल सुनवाई जारी है। अदालत ने अगली तिथि 11 जनवरी नियत की है, जिसमें प्रदेश सरकार को अपना पक्ष रखना है।