प्रदेश सरकार की ओर से निजी स्कूलों की ओर से ऑनलाइन क्लास के दौरान मनमाने तरीके से खेल, पुस्तकालय, प्रयोगशाला, विज्ञान, कंप्यूटर, वार्षिक उत्सव शुल्क वसूले जाने पर रोक लगाए जाने के पहले ही स्कूलों ने इससे बचने का रास्ता खोज लिया है। स्कूलों ने अपनी फीस रसीद से विभिन्न मदों में ली जाने वाली फीस का ब्रेकअप खत्म करके उसे कंपोजिट फीस का नाम दे दिया है। अब फीस रसीद में खेल, पुस्तकालय, प्रयोगशाला, विज्ञान, कंप्यूटर सहित दूसरे शुल्क का उल्लेख ही नहीं होने पर ऑनलाइन कक्षा के दौरान भी स्कूल मनमानी करते रहेंगे।
दूसरे मदों की फीस को कंपोजिट फीस में समायोजित किया
सरकार की ओर से निजी स्कूलों के लिए ऑनलाइन क्लास के दौरान खेल, पुस्तकालय, प्रयोगशाला, विज्ञान, कंप्यूटर, वार्षिक उत्सव शुल्क वसूले जाने पर रोक लगाए जाने के बाद जब अभिभावकों ने स्कूलों से संपर्क किया तो उनका कहना था कि वह मात्र ट्यूशन फीस ले रहे हैं, दूसरे मदों में ली जाने वाली फीस नहीं ले रहे। अभिभावक एवं हाईकोर्ट में स्कूल की फीस को लेकर वाद दाखिल करने वाले अधिवक्ता प्रशांत कुमार शुक्ल का कहना है कि शहर के 99 फीसदी स्कूल ऐसे हैं जो शिक्षण शुल्क के साथ दूसरे मदों की फीस कंपोजिट फीस के माध्यम से वसूल रहे हैं। उनका कहना है कि प्रबंधकों ने दूसरे मदों में ली जाने वाली फीस शिक्षण शुल्क (कंपोजिट फीस) में समायोजित कर दिया है।
निजी स्कूलों ने 2018 में बने फीस रेगुलेशन एक्ट का पालन नहीं किया
अभिभावक आरके पांडेय का कहना है कि स्कूलों की ओर से फीस रसीद में शिक्षण शुल्क के अतिरिक्त दूसरी फीस का विवरण नहीं देने से निजी स्कूल मनमानी पर उतारू हैं। निजी स्कूलों के फीस में कहीं भी इंगित नहीं है कि स्कूल इतनी मोटी फीस किस बात की ले रहे हैं। अभिभाव रवींद्र मिश्र का कहना है कि 2017-2018 तक फीस रसीद में अन्य मदों से ली जाने वाली फीस का विवरण होता था। 2018-2019 में स्कूलों ने फीस बढ़ाते हुए दूसरे मदों में ली जाने वाली फीस के ब्रेकअप को खत्म करते हुए शिक्षण शुल्क (कंपोजिट फीस) में समायोजित कर दिया गया। स्कूल इस प्रकार से अभिभावकों एवं सरकार की आंख में धूल झोकने का काम कर रहे हैं। सरकार की ओर से 2018 में फीस रेगुलेशन एक्ट बना तो किसी निजी स्कूल ने इसका पालन नहीं किया।
डीएम स्कूलों को फीस का विवरण देने का आदेश दें
अभिभावकों ने जिलाधिकारी एवं जिला विद्यालय निरीक्षक से स्कूलों की ओर से की गई हेराफेरी की जांच करवाने की मांग की है। स्कूलों से फीस का ब्रेकअप रसीद में देने के लिए आदेश दिया जाए। स्कूलों से 2017-2018 से 2021-2022 तक का फीस का विवरण लेकर फीस रसीद में पुरानी व्यवस्था लागू कराएं। इससे पूर्व में कोर्ट ने भी अभिभावकों से मात्र शिक्षण शुल्क वसूल करने का निर्देश दिया था। अभिभावकों ने कंपोजिट फीस की जगह फीस का विवरण (ब्रेकअप) देने की मांग की है। अभिभावकों का कहना है कि कोरोना महामारी के दौर में यदि स्कूलों की मनमानी पर लगाम नहीं लगा तो आंदोलन को बाध्य होंगे।