धूमनगंज के मरियाडीह इलाके में ढाई साल पहले अलकमा और सुरजीत हत्याकांड का मामला अब डीजीपी के पास पहुंच गया है। मरियाडीह की ग्राम प्रधान रुबीना बेगम ने डीजीपी को पत्र भेजकर अतीक के गुर्गों कम्मो जाबिर समेत अन्य आरोपियों और पुलिस की मिलीभगत की शिकायत की है। कम्मो और जाबिर की गिरफ्तारी अब तक न होने पर न्यायालय ने भी इंस्पेक्टर धूमनगंज को कारण बताओ नोटिस जारी किया है।
मरियाडीह में 25 सितंबर को आबिद की बहन अलकमा और ड्राइवर सुरजीत की कातिलों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी। इस मामले में अतीक के गुर्गे कमरूल उर्फ कम्मो, जाबिर, शाबिर, वशी अहमद, इंतखाब और तौसीफ के खिलाफ केस दर्ज कराया गया था। उनके खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी है। पुलिस उनके घरों की कुर्की कर चुकी थी।
उधर प्रदेश सरकार बदलने के बाद एक बार फिर मामले की जांच शुरू हुई और पुलिस इस केस को हॉरर किलिंग से जोड़ते हुए अलकमा के भाई आबिद और उसके साथियों को नामजद कर दिया। उधर कम्मो और जाबिर के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी रहा। 20 मार्च को न्यायालय ने कम्मो और जाबिर समेत अन्य आरोपियों के अब तक अदालत में हाजिर न कर पाने पर कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया है। इसी को आधार बनाकर आबिद की पत्नी रुबीना बेगम ने डीजीपी को पत्र भेजा है। उनका आरोप है कि कम्मो और जाबिर अतीक के गुर्गे हैं और क्षेत्र में आतंक मचा हुए हैं। रुबीना ने इस मामले में पुलिस की भूमिका पर संदेह जाहिर करते हुए जांच की मांग की है।