28 साल पुराने फिक्स डिपॉजिट रसीद (एफडीआर) विवाद में जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) को राहत देते हुए याची का दावा खारिज कर दिया। यह आदेश आयोग के अध्यक्ष मोहम्मद इब्राहीम और सदस्य प्रकाश चंद्र त्रिपाठी की पीठ ने रितेश कुमार की ओर से दायर परिवाद पर दिया।
अलोपीबाग की पंजाबी कॉलोनी निवासी रितेश कुमार ने आरोप लगाया था कि उन्होंने वर्ष 1996–97 में पीएनबी की मीरापुर शाखा से तीन एफडीआर खरीदी थीं। ये एफडीआर उप्र जल निगम के पास गिरवी रखी गई थीं और परिपक्वता के बाद स्वतः नवीनीकृत होनी थीं। वहीं, बैंक ने एफडीआर का सही नवीनीकरण नहीं किया और ब्याज की गलत गणना की। वर्ष 2011 तक कुल 5,59,298 रुपये मिलना चाहिए थे, जबकि बैंक ने एक मार्च 2013 को केवल 2,56,900 का भुगतान किया।
पीएनबी की ओर से अधिवक्ता ने दलील दी कि एफडीआर लंबे समय तक विलंबित (ओवरड्यू) रहीं। नियमानुसार ऐसी एफडीआर का नवीनीकरण तभी संभव होता है, जब मूल जमा रसीदें बैंक में प्रस्तुत की जाएं। ओवरड्यू अवधि पर ब्याज सेविंग अकाउंट की दर से देय होता है। साथ ही याची को आरटीआई के माध्यम से सभी आवश्यक जानकारियां पहले ही उपलब्ध करा दी गई थीं और भुगतान नियमानुसार किया गया। आयोग ने कहा कि तीनों एफडीआर 1996 से 2011 तक उप्र जल निगम के पास गिरवी रहीं। न याची और न ही संबंधित विभाग ने समय रहते नवीनीकरण के लिए कोई निर्देश दिया। जबकि, बैंक ने नियमों के अनुसार भुगतान किया।