फूलपुर(इलाहाबाद)। धान की फसल सूखकर और गेहूं की फसल डूबकर बर्बाद हो गई। गेहूं की बर्बादी से बेहाल किसानों को राहत पहुंचाने के लिए महीनों बाद शासन से चेक आया तो तहसील के अफसर और कर्मचारी उस पर कुंडली मारकर बैठ गए। फूलपुर तहसील में ऐसा ही एक मामला सामने आया है, जहां लेखपाल ने सौ रुपये के लिए किसानों के चेक रोक लिए। एसडीएम से लेखपाल की शिकायत भी की गई। लेखपाल पर कार्रवाई तो दूर, हफ्तों बीतने के बाद भी किसानों को चेक नहीं मिल सके।
हफ्तों पहले फूलपुर तहसील के कोड़ापुर गांव में मुआवजे के चेक बंटने के लिए पहुंचे तो किसानों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। किसानों ने तो उम्मीद ही छोड़ दी थी कि उन्हें मुआवजा मिलेगा। हालांकि चेक पहुंचने की यह खुशी उस वक्त काफूर हो गई जब लेखपाल ने चेक के बदले किसानों से सौ से दो सौ रुपये देने के लिए कहा।
संपन्न किसानों के लिए सौ-दो सौ रुपये बड़ी चीज नहीं थी, सो उन्हें चेक भी आसानी से मिल गए लेकिन तमाम ऐसे किसान भी हैं, जो पहले बारिश की वजह से गेहूं की फसल डूबने और फिर बिन बारिश धान की फसल सूखने के कारण पूरी तरह से बर्बाद हो गए। उनके लिए दो वक्त की रोटी का इंतजाम कर पाना मुश्किल हो गया है, चेक के लिए रिश्वत कहां से देंगे।
फिलहाल ऐसे किसानों को अब तक चेक नहीं मिले हैं। गांव के राम अधार यादव, हरीश चंद्र, कलीम उल्ला, राजाराम जायसवाल, जावेद सहित तमाम किसानों का कहना है कि उन्होंने लेखपाल को पैसे नहीं दिए, सो चेक भी नहीं मिला। चेक के लिए तकरीबन रोज तहसील के चक्कर लगा रहे हैं।
एसडीएम राजकुमार द्विवेदी से भी मामले की शिकायत की गई लेकिन अब तक न तो चेक मिला और न ही वसूली पर कोई रोक लगी। लेखपाल अब भी उन किसानों को चेक बांट रहा है, जो किसी तरह मजबूरी में उसकी मांग को पूरा कर रहे हैं। अगर अफसरों ने सिर्फ इतनी तस्दीक कर ली होती कि वितरण के लिए आए चेक लाभार्थियों के हाथ में पहुंचे या नहीं, तो किसानों को उत्पीड़न का शिकार न होना पड़ता।
‘यह किसानों से जुड़ा बेहद गंभीर मामला है। इसकी जांच कराई जाएगी और दोषी के खिलाफ सीधे निलंबन की कार्रवाई की जाएगी।’
संजय कुमार, जिलाधिकारी