अगर यह परीक्षा इस वर्ष न हो पाती तो डेढ़ दशक के बाद सत्र शून्य होने की नौबत आ जाती और आयोग की साख पर बट्टा लगता। ऐसे में अभ्यर्थियों के आंदोलन के बाद पीछे हटे आयोग ने यह परीक्षा लंबे समय तक टालने की जगह दिसंबर में ही कराने का निर्णय लिया। आपाधापी में केंद्र निर्धारण संबंधी दिशा-निर्देश भी जारी कर दिए गए, जिसमें पीसीएस के लिए परीक्षा केंद्रों के निर्धारण में शहर से अधिकतम 10 किमी की दूरी की अनिवार्यता भी हटा दी गई।
वहीं, पेपर लीक के बाद निरस्त की गई आरओ/एआरओ प्रारंभिक परीक्षा 22 व 23 दिसंबर को प्रस्तावित की गई थी, जो अब स्थगित कर दी गई है। आयोग ने परीक्षा की नई तिथि तय करने के लिए समिति का गठन किया है। अभ्यर्थियों में चर्चा है कि आरओ/एआरओ प्रारंभिक परीक्षा अब अगले साल कुंभ के बाद ही होने की उम्मीद है।
आरओ/एआरओ के 441 पदों के लिए 1076004 अभ्यर्थियों ने आवेदन किए हैं। आयोग के इतिहास में पहली बार किसी परीक्षा के लिए इतनी अधिक संख्या में आवेदन आए हैं। अभ्यर्थी अब समिति की रिपोर्ट और आयोग के फैसले का इंतजार कर रहे हैं। अगर आयोग आगे भी दो दिन में परीक्षा कराने निर्णय लेता है तो उसे अभ्यर्थियों के विरोध का फिर से सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में आयोग पर आरओ/एआरओ परीक्षा भी एक दिन में कराने का दबाव होगा।