अभ्यर्थियों की ओर से उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग के कार्यों की सीबीआई जांच कराए जाने की मांग को झटका लग सकता है। सरकार इसके लिए तैयार नजर नहीं आ रही है। माना जा रहा है कि जांच हुई तो पहले से चयनित हो चुके अभ्यर्थियों की नौकरी पर भी संकट आ सकता है। सरकार एक वर्ग को खुश करने के लिए दूसरे को नाराज नहीं करना चाहती है। ऐसे में अब कोई बीच का रास्ता खोजा रहा है। सीबीआई जांच की मांग कर रहे अभ्यर्थियों को संतुष्ट करने के लिए आयोग के कुछ ऐसे अफसरों पर कार्रवाई हो सकती है, जिन पर भ्रष्टाचार के आरोप हैं।
पांच वर्षों में आयोग की ओर से हुई भर्तियों को लेकर अभ्यर्थियों में जबर्दस्त आक्रोश रहा। भर्तियों में गड़बड़ी के मामले भी लगातार सामने आते रहे। कॉपियों के कोड नंबर बदल दिए गए, एक जाति विशेष के अभ्यर्थियों का पीसीएस चयन बड़ा मुद्दा बना, प्रश्नों के गलत जवाब दिए गए। पांच वर्षों तक किसी न किसी मामले को लेकर आयोग विवादों में घिरा रहा। कई मामलों में अभ्यर्थियों की आपत्ति के बाद जांच में गड़बड़ी साबित भी हुई। अभ्यर्थियों ने आयोग की सीबीआई जांच के खिलाफ प्रदेशव्यापी आंदोलन छेड़ा। चुनाव से पहले भाजपा के वरिष्ठ नेताओं ने भी चुनावी जनसभाओं में घोषणा की थी कि प्रदेश में उनकी सरकार बनी तो भर्तियों में हुए घोटालों की सीबीआई जांच कराई जाएगी। कुछ अन्य मुद्दों पर भी भाजपा ने सरकार बनने पर अभ्यर्थियों की मांगें पूरी करने का आश्वासन दिया था।
इनमें से एक मुद्दा था कि पीसीएस में सीसैट से प्रभावित अभ्यर्थियों को दो अतिरिक्त अवसर दिए जाएंगे। भाजपा सरकार ने अभ्यर्थियों की यह मांग पूरी कर दी है, लेकिन सीबीआई जांच के मसले पर सरकार ने चुप्पी साध रखी है। सूत्रों का कहना है कि सरकार अब सीबीआई जांच नहीं कराना चाहती है। अगर जांच होती है और पूर्व में हुई भर्तियों में घोटाले साबित हो जाते हैं तो बड़ी संख्या में चयनित अभ्यर्थियों की नौकरी चली जाएगी और तब राजनैतिक दृष्टि से भाजपा सरकार का यह दांव उसी पर भारी पड़ सकता है, लेकिन सरकार के सामने आयोग से असंतुष्ट अभ्यर्थियों की मांग पूरी करना भी मजबूरी है। ऐसे में अब बीच का रास्ता तलाश जा रहा है। संभावना जताई जा रही है कि अभ्यर्थियों को संतुष्ट करने के लिए सरकार आयोग में बड़ा फेरबदल भी कर सकती है और कुछ अफसरों के खिलाफ भी की जा सकती है।