छात्राें और प्रतियोगियों के आंदोलन के मद्देनजर उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग परिसर तथा आसपास के क्षेत्रों को छावनी में तब्दील कर दिया गया था। इसका नतीजा रहा कि शहर के बाकी हिस्सों में सुरक्षा का कोई इंतजाम नहीं था तथा छात्रों और प्रतियोगियों को तांडव की खुली छूट मिली। सीमित संख्या में फोर्स होने की वजह से पुलिस कर्मियों को भी एक से दूसरे स्थान में भागने में काफी मशक्कत करनी पड़ी। इसकी वजह से उनके सामने लाठी पटकने के अलावा कोई चारा भी नहीं रहा।
प्रतियोगियों और छात्रों के हल्ला बोल की घोषणा के मद्देनजर जिला और पुलिस प्रशासन का पूरा फोकस आयोग की सुरक्षा पर रहा। आयोेग दफ्तर पर पुलिस और पीएसी के अलावा आरएएफ के जवान भी मौजूद रहे। इतना ही नहीं राणा प्रताप चौराहा, हिन्दू हॉस्टल, धोबी घाट चौराहा समेत आयोग की तरफ जाने वाली हर सड़क पर बैरियर लगा दिया गया था। इसके अलावा हर बैरियर पर भारी संख्या में फोर्स मौजूद थी। इसका नतीजा रहा कि छात्रों और प्रतियोगियों का अन्य क्षेत्रों में जमावड़ा हुआ। उन्हाेंने जमकर उपद्रव भी किया।
हालैैंड हाल, ताराचंद, बैंक रोड समेत जहां भी बवाल हुआ वहां दूर-दूर तक पुलिस नहीं थी। इसका नतीजा यह रहा कि बस में तोड़फोड़, आगजनी आदि के लिए पर्याप्त समय मिला। इस दौरान हुए पथराव में विश्वविद्यालय के आसपास, बैंक रोड से गुजरने वालों की जान भी जोखिम में रही। हालांकि किसी तरह की अनहोनी की सूचना नहीं है। इस तरह से पूरी फोर्स आयोग के आसपास लगा दिए जाने से आमलोगों के साथ सुरक्षा कर्मियों में भी नाराजगी दिखी।