मऊआइमा विकासखंड के ग्राम घीनपुर के मजरा दामोदरपुर में कुदरू की तोड़ाई करता किसान।
परंपरागत खेती से इतर व्यावसायिक खेती किसानों के लिए ज्यादा किफायती और लाभदायक साबित हो रही है। मऊआइमा विकासखंड के ग्रामसभा घीनपुर के मजरा दामोदरपुर के किसान अविनाश कुमार पटेल पुत्र कालेश्वर ने पांच बिस्वा में अक्तूबर में आलू के साथ ही कुंदरू की खेती की।
आलू के साथ ही वह कुंदरू के पौधे में समय-समय पर खाद, पानी और कीटनाशक का छिड़काव करते रहे ताकि पौधे में कीट न लग सके और वह सेहतमंद रहे। मार्च में आलू की खोदाई के बाद कुंदरू में लगी फली की देखभाल की। इसके बाद मई में कुंदरू की पैदावार शुरू हुई तो वह पूरे परिवार के साथ उसकी तोड़ाई कर पांच माह में करीब पांच लाख रुपये कमा चुके हैं।
किसान अविनाश ने बताया कि आलू की सिंचाई और निराई-गुड़ाई के साथ पौधे धीरे-धीरे तैयार होते रहे। जब आलू तैयार हो गई तो फावड़े से कुंदरू के पौधों को बचाकर उसे खोद लिया गया। इसके बाद पौधों के पास बांस और रस्सी की सहायता से एक छप्परनुमा ढांचा तैयार किया गया।
पांच सदस्यीय परिवार ने लगातार एक महीने की मेहनत से मई में प्रतिदिन दो क्विंटल कुंदरू तोड़ना शुरू किया। शुरुआत में ही इसकी कीमत 3,500 रुपये प्रति कुंतल रही। सितंबर से भाव गिरे तो कीमत 2,000 प्रति क्विंटल हो गई। अविनाश ने बताया कि पांच बिस्वा कुंदरू की खेती करने में करीब 20 से 25 हजार रुपये की लागत आई। अक्तूबर में हर दूसरे दिन करीब दो से ढाई क्विंटल कुंदरू तोड़ रहे हैं। इसी माह के अंत तक वह फिर से आलू के साथ कुंदरू की डंठल लगाकर दोनों की खेती एक साथ करेंगे। उन्होंने कहा कि एक से भले दो वाले सिद्धांत से अच्छी कमाई हो रही है।