किसानों की मजबूरी, धंधेबाजों की मौज
भीटी, उपरहार, झलवा, सैदपुर खास, रसूलपुर मरियाडीह, बरवा भगवतपुर, कनिहार हेतापुर रोड, लीलापुर रोड, लीलापुर रोड, दैलतपुर बजहां, देवघाट, नसीरपुर सिलना, उस्तापुर महमूदाबाद, चमनगंज, कोइलहा जीटी रोड सहित 100 से अधिक ऐसे इलाके हैं जहां अवैध प्लाटिंग हो रही है। लीलापुर झूंसी के किसान रामानंद, झलवा के बद्री और नैनी के राम तपेसर गुप्ता बताते हैं कि प्रॉपर्टी डीलर मामूली रकम देकर जमीन का तीन से पांच साल का एग्रीमेंट करा लेते हैं।
बाद में जब प्लॉटिंग पर पीडीए का बुलडोजर चलता है तो किसान न तो मुकदमा कर पाते हैं और न ही अपनी जमीन वापस ले पाते हैं। एग्रीमेंट की अवधि खत्म होने के बाद उन्हें औने-पौने दाम पर जमीन प्रॉपर्टी डीलर को बेचनी पड़ती है। उधर प्रॉपर्टी डीलर जमीन पर प्लॉटिंग कर चुके होते हैं और करोड़ों का मुनाफा कमा लेते हैं। किसानों का कहना है कि यह खेल वर्षों से चल रहा है। पीडीए की ढीली व्यवस्था और भ्रष्ट गठजोड़ ने किसानों की जमीन और उनकी जिंदगियों को दांव पर लगा दिया है।
ऐसे होता है खेल
प्रलोभन का जाल : प्रॉपर्टी डीलर किसानों को थोड़े पैसे देकर जमीन बेचने का लालच देते हैं।
एग्रीमेंट का हथकंडा : ज़मीन का तीन से पांच साल का एग्रीमेंट कराते हैं।
प्लॉटिंग की शुरुआत : किसानों की जमीन को टुकड़ों में बांटकर बेचने की तैयारी होती है।
पीडीए की कार्रवाई : अवैध प्लॉटिंग पर पीडीए बुलडोजर चलाता है और केस दर्ज होता है।
किसानों की मजबूरी : केस के डर और अत्यधिक खर्च के कारण किसान चुप हो जाते हैं।
औने-पौने दम पर बिक्री : एग्रीमेंट खत्म होते ही किसान मजबूर होकर जमीन सस्ते दाम पर डीलरों को बेच देते हैं।