सूखा राहत में फर्जीवाड़े का आरोप लगाते हुए बारा के किसानों ने बृहस्पतिवार को कलक्ट्रेट का घेराव और धरना-प्रदर्शन किया। किसानों का आरोप है कि पिछले सत्र में धान की फसल के सूखा राहत आवंटन में लेखपाल ने जमकर मनमानी की और पात्र किसानों को सूखा राहत न देकर घपला किया गया।
किसान संघर्ष समिति बारा के बैनर तले धरना-प्रदर्शन कर रहे किसानों ने कहा कि बारा के कोहड़िया, जूही, जिगना, सोनपुरा, तालापार, तेदुंआ आदि गांवा में सूखा राहत आवंटन में जमकर घपला हुआ है। धरने में शामिल कोहड़िया गांव के पूर्व प्रधान इंद्रो सिंह ने आरोप लगाया कि कि हल्का लेखपाल ने पैसा लेकर गांव में सिर्फ 34 किसानों को सूखा राहत के लिए चिह्नित किया जबकि गांव में 400 लघु एवं सीमांत किसान हैं। पिछले साल उनकी धान की फसल पूरी तरह से बर्बाद हो गई और वे सूख राहत पाने के हकदार हैं। गांव में एक ही खेत के पांच जोतदारों में दो को सूखा राहत दिया गया जबकि पांचों के नाम खतौनी में हैं और सभी सूखा से प्रभावित हुए। गांव में लापरवाही के एक-दो नहीं, बल्कि दर्जनों उदाहरण हैं।
धरना-प्रदर्शन में विधायक अनुग्रह नारायण सिंह, पार्षद शिवसेवक सिंह एवं डॉ. एसके मालवीय भी शामिल हुए और भ्रष्टाचार के खिलाफ इस लड़ाई में किसानों को समर्थन की घोषणा की। धरना-प्रदर्शन में किसान नेता पुष्पेंद्र विश्वकर्मा, विजय शंकर, घनश्याम मौर्य, विनोद कुमार, विनोद कुमार, शिव कुमार, देव पटेल, नागेंद्र सिंह, लाल बहादुर, पप्पू, रमाशंकर सिंह, इंद्रजीत सिंह आदि शामिल रहे।