वर्षों से राजस्व विभाग में अपनी सेवाएं दे रहे सामायिक संग्रह अमीनों ने विनियमितीकरण और चयन प्रक्रिया में आयु सीमा में छूट की मांग उठाई है। इस संबंध में सामायिक संग्रह अमीनों के प्रतिनिधिमंडल ने प्रदेश अध्यक्ष राम प्रताप पाण्डेय और प्रदेश महामंत्री हरवीर सिंह के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक से मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल ने उपमुख्यमंत्री को मुख्यमंत्री के नाम संबोधित पत्र सौंपकर अपनी मांगों पर शासन स्तर पर सकारात्मक निर्णय लिए जाने का आग्रह किया।
प्रतिनिधिमंडल ने बताया कि राजस्व विभाग के संग्रह अनुभाग में लंबे समय से कार्यरत सामायिक संग्रह अमीनों के विनियमितीकरण के लिए शासन द्वारा समय-समय पर विभिन्न व्यवस्थाएं लागू की गई हैं। सेवा नियमावली-1992 के तहत 35 प्रतिशत पदों पर चयन की व्यवस्था निर्धारित की गई थी।
प्रतिनिधिमंडल के मुताबिक, शासनादेश संख्या 616/एक-7-2017/रा0-7, दिनांक 30 अक्टूबर 2017 के माध्यम से चयन के लिए अधिकतम आयु सीमा 45 वर्ष निर्धारित कर दी गई। इसके चलते लंबे समय से विभाग में कार्यरत कई सामायिक संग्रह अमीन आयु सीमा अधिक होने के कारण चयन प्रक्रिया से बाहर हो गए और उन्हें विनियमितीकरण का लाभ नहीं मिल सका।
अमीनों ने उपमुख्यमंत्री के समक्ष मांग रखी कि वर्षों से विभाग में कार्यरत कर्मचारियों के अनुभव और सेवा अवधि को देखते हुए आयु सीमा में आवश्यक शिथिलता प्रदान की जाए, ताकि वे चयन एवं विनियमितीकरण की प्रक्रिया में शामिल हो सकें।
प्रतिनिधिमंडल ने 30 मई 2008 के शासनादेश को पुनः बहाल कर पूर्व में लागू व्यवस्था के अनुसार सामायिक संग्रह अमीनों के हित में निर्णय लिए जाने की मांग भी की। इसके साथ ही प्रमुख सचिव, राजस्व विभाग को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करने का अनुरोध किया गया।
सामायिक संग्रह अमीनों का कहना है कि वे लंबे समय से राजस्व विभाग के महत्वपूर्ण कार्यों का जिम्मेदारीपूर्वक निर्वहन कर रहे हैं। इसके बावजूद वर्तमान आयु सीमा के कारण कई अनुभवी कर्मचारी चयन प्रक्रिया से वंचित हो रहे हैं। ऐसे में शासन की ओर से आयु सीमा में शिथिलता दिए जाने से वर्षों से सेवा दे रहे कर्मचारियों को राहत मिल सकती है।
प्रतिनिधिमंडल ने उम्मीद जताई कि उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक उनकी मांगों को मुख्यमंत्री तक पहुंचाते हुए संबंधित विभाग को आवश्यक कार्रवाई के लिए निर्देशित करेंगे। अमीनों ने शासन से जल्द सकारात्मक निर्णय लेकर वर्षों से लंबित विनियमितीकरण की समस्या का समाधान किए जाने की मांग की है।