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Prayagraj : जीबीएस पीड़ित बच्चों का सीएमओ ने लिया संज्ञान, मांगी मेडिकल रिपोर्ट

Mon, 10 Mar 2025 04:33 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

लखनऊ के मेदांता अस्पताल में जीबीएस (गुइलेन-बैरे सिंड्रोम) से पीड़ित दोनों बच्चों का मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. एके तिवारी ने संज्ञान लिया है। अमर उजाला में खबर प्रकाशित होने के बाद उन्होंने दोनों बच्चों के परिजनों से मेडिकल रिपोर्ट मांगी और पीड़ितों के स्वास्थ्य का हाल जाना।
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जीबीएस सिंड्रोम। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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लखनऊ के मेदांता अस्पताल में जीबीएस (गुइलेन-बैरे सिंड्रोम) से पीड़ित दोनों बच्चों का मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. एके तिवारी ने संज्ञान लिया है। अमर उजाला में खबर प्रकाशित होने के बाद उन्होंने दोनों बच्चों के परिजनों से मेडिकल रिपोर्ट मांगी और पीड़ितों के स्वास्थ्य का हाल जाना। उन्होंने दोनों बच्चों में जीबीएस होने की बात स्वीकार की। साथ ही पीड़ितों के परिजनों की मांग पर आर्थिक मदद कराने का आश्वासन भी दिया।

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दरअसल, लखनऊ के मेदांता में दोनों बच्चे लंबे समय से भर्ती हैं। इनमें एक सात साल का बच्चा 18 नवंबर 2024 और दूसरा छह वर्षीय 13 फरवरी से भर्ती है। परिजनों का कहना है, कि अब तक इलाज में 30 से 35 लाख रुपये तक खर्च हो गया है। हालांकि इलाज के दौरान 18 नवंबर से भर्ती बच्चे को सरकार की तरफ से 2.50 लाख रुपये और 13 फरवरी से भर्ती बच्चे को 1.50 रुपये की मदद प्रधानमंत्री राहत कोष से मिल चुकी है, लेकिन यह पर्याप्त नहीं है। यही कारण है कि परिजनों ने एक बार फिर से केंद्र व राज्य सरकार से मदद की गुहार लगाई है। वहीं चिकित्सकों का कहना है कि बच्चों की हालत में पहले से सुधार हुआ है, मगर यह कब तक पूरी तरह से ठीक हो पाएंगे, अभी यह कह पाना मुश्किल है।

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डब्ल्यूएचओ की टीम ने भी लिया संज्ञान

विश्व स्वास्थ्य संगठन की टीम ने भी दोनों बच्चों की बीमारी का संज्ञान लिया है। टीम के सदस्यों ने दोनों बच्चों का अलग-अलग सर्वे किया है। उन्होंने परिजनों से बात करने के अलावा अस्पताल प्रशासन से मेडिकल रिपोर्ट भी मांगी।

दिल्ली के एम्स हॉस्पिटल में जीबीएस बीमारी के एक बच्चे को ठीक होने में पांच महीने का समय लग गया। ऐसे में अस्पताल का महंगा खर्च अब उठा पाना मुश्किल हो रहा है। हम सरकार से आर्थिक मदद की मांग करते हैं। --चंद्र प्रकाश मौर्य, पिता।

13 फरवरी से मेरा नाती बराबर वेंटिलेटर पर है, जिसकी वजह से लंबा खर्च आ रहा है। इलाज में कितना समय लगेगा, इसका कुछ पता नहीं है। सरकार से कुछ मदद मिली है। अगर कुछ सहायता और मिल जाए तो राहत होगी। --चंद्र दत्त शुक्ला, दादा।

18 नवंबर से जो बच्चा भर्ती है, उसकी माैखिक जानकारी मिली थी। वहीं जीबीएस से पीड़ित दूसरे बच्चे के बारे में खबर प्रकाशित होने के बाद पता चला है। दोनों बच्चों की मेडिकल रिपोर्ट मांगी गई है, जिसे शासन को भेजा जाएगा। --- डॉ. एके तिवारी, सीएमओ।

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