इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बागपत की दुष्कर्म पीड़िता के अनचाहे गर्भ समापन की अनुमति के लिए सीएमओ मेरठ को चार विशेषज्ञ डाक्टरों का मेडिकल बोर्ड गठित करने और 24 घंटे में रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने लाला लाजपत राय मेडिकल कॉलेज मेरठ के प्राचार्य को इस जांच में सहयोग करने और जिलाधिकारी मेरठ को पीड़िता के परिवार के मेरठ आने व ठहरने का खर्च उठाने का निर्देश दिया है।
यह आदेश न्यायमूर्ति एमके गुप्ता तथा न्यायमूर्ति राम मनोहर नारायण मिश्र की खंडपीठ ने पीड़िता की मां की ओर से दाखिल याचिका पर दिया। कोर्ट ने अगली सुनवाई के लिए 26 अगस्त की तिथि तय की है। बागपत की नाबालिग दुष्कर्म पीड़िता की मां ने घटना के संबंध में थाना सिंघवाली अहीर में एफआईआर दर्ज कराई है।
इस दौरान पीड़िता ने अनचाहा गर्भ गिराने की अनुमति के लिए भी अदालत में अर्जी दाखिल की। सीएमओ की ओर प्रस्तुत रिपोर्ट में 20 सप्ताह से कम का गर्भ बताया गया और कहा गया कि गर्भ समापन हो सकता है। अदालत ने मेडिकल बोर्ड से दोबारा जांच रिपोर्ट मांगी। वह भी पक्ष में रही। इसके बावजूद एडीजे/विशेष जज पॉक्सो एक्ट ने अनचाहा गर्भ गिराने की अनुमति देने से इन्कार कर दिया। इसके बाद याची ने इसे हाईकोर्ट में चुनौती दी।
मुख्य सचिव से अनचाहे गर्भ समापन मामले में मांगा हलफनामा
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मुख्य सचिव को अनचाहे गर्भ के समापन की अनुमति देने में देरी के बजाय जल्द कार्रवाई की गाइडलाइंस के साथ हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है। साथ ही पूछा है कि गर्भ गिराने के लिए मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट पर अनुमति देने में देरी को कैसे कम किया जा सकता है। कोर्ट ने कहा कि मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट पक्ष में होने पर अनचाहा गर्भ समाप्त न करना पीड़िता के शारीरिक व मानसिक स्वास्थ्य के लिए खतरा हो सकता है।