फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

High Court : विभागीय जांच में क्लीन चिट आपराधिक कार्यवाही रद्द करने का आधार नहीं

Fri, 12 Sep 2025 02:42 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि आपराधिक मुकदमा केवल इस आधार पर खत्म नहीं किया जा सकता है कि समान आरोपों पर विभागीय कार्यवाही में अभियुक्त को क्लीन चिट मिल चुकी है।
विज्ञापन
अदालत का फैसला। - फोटो : अमर उजाला।
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि आपराधिक मुकदमा केवल इस आधार पर खत्म नहीं किया जा सकता है कि समान आरोपों पर विभागीय कार्यवाही में अभियुक्त को क्लीन चिट मिल चुकी है। इस टिप्पणी संग न्यायमूर्ति समीर जैन की अदालत ने ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के तत्कालीन सहायक प्रबंधक ब्रह्मसिंह की ओर से भ्रष्टाचार के मामले को चुनौती देने वाले याचिका खारिज कर दी।

विज्ञापन


गौतमबुद्ध नगर में ब्रह्म सिंह के खिलाफ 30 मार्च 2019 को कासना थाने में आय से अधिक संपत्ति का मुकदमा दर्ज हुआ था। आरोप था कि जांच अवधि में उनकी आय 43.71 लाख रुपये थी जबकि व्यय 1.03 करोड़ रुपये पाया गया, यानी आय से लगभग 137 प्रतिशत अधिक। मामले में जांच के आधार पर आरोप पत्र दाखिल किया गया और मेरठ स्थित विशेष न्यायाधीश (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम) ने संज्ञान लेकर समन जारी किया। इसके खिलाफ याची ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

याची के अधिवक्ता ने दलील दी कि विभागीय जांच 2018, 2019 और अंतिम 2022 में ब्रह्म सिंह को आय से अधिक संपत्ति के आरोप से मुक्त कर दिया गया। यहां तक कि राज्य लोक सेवा अधिकरण, लखनऊ ने भी 2023 में उन्हें राहत दी और निंदा दंड तक रद्द कर दिया। ऐसे में एक ही आरोपों पर आपराधिक मुकदमे का जारी रहना कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग है। वहीं, अपर शासकीय अधिवक्ता ने याचिका का विरोध किया। कहा कि विभागीय और आपराधिक कार्यवाहियों के मानक अलग होते हैं। विभागीय जांच में बरी होना, आपराधिक मुकदमे में स्वतः बरी होने का आधार नहीं हो सकता। आरोप पत्र और जांच सामग्री प्रथम दृष्टया अपराध सिद्ध करते हैं। इस पर कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें