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इलाहाबाद विवि में 22 तक कक्षाएं स्थगित, बायोमैट्रिक हाजिरी पर रोक

Sun, 15 Mar 2020 01:24 AM IST
विनोद सिंह न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
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इलाहाबाद विश्वविद्यालय
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कोराना वायरस के मद्देनजर इलाहाबाद विश्वविद्यालय (इविवि) एवं संघटक महाविद्यालयों में 22 मार्च तक कक्षाएं स्थगित कर दी गई हैं। साथ ही बायोमैट्रिक हाजिरी पर रोक लगा दी गई है। रजिस्ट्रार प्रो. एनके शुक्ला की ओर से जारी पत्र में कहा गया है कि कोराना वायरस के फैलाव को रोकने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने 22 मार्च तक सभी स्कूल-कॉलेजों को बंद करने का निर्देश दिया है।
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न तथ्यों को संज्ञान में लेते हुए विश्वविद्यालय एवं संबद्ध महाविद्यालयों की सभी कक्षाएं 22 मार्च तक स्थगित रहेंगी। विश्वविद्यालय एवं संबद्ध महाविद्यालयों की परीक्षाओं का संचालन पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार होगा लेकिन नई परीक्षाओं का आयोजन अगले आदेश तक स्थगित रहेगा। इसके अलावा इविवि में 31 मार्च तक बायोमैट्रिक हाजिरी बंद रहेगी और विकल्प के तौर पर उपस्थिति पंजिका का प्रयोग किया जाएगा।

हॉस्टलों को सेनेटाइज करने की मांग

कोराना महामारी से बचाव के लिए इलाहाबाद विश्वविद्यालय में तो 22 मार्च तक कक्षाएं स्थगित कर दी गईं लेकिन महिला एवं पुरुष हॉस्टलों में बचाव के लिए कोई ठोस उपाय नहीं किए गए हैं। पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष ऋचा सिंह ने कुलपति को ज्ञापन देकर मांग की है कि हॉस्टलों को सेनेटाइज कराया जाए। हॉस्टलों में बड़ी मात्रा में हैंडवॉश लगवाए जाएं और छात्र-छात्राओं, स्टाफ, कर्मचारियों, शिक्षकों को नि:शुल्क मास्क उपलब्ध कराए जाएं। साथ ही यूजीसी की ओर से जारी गाइडलाइन का पूरी तरह से पालन किया जाए।

इग्नू शिक्षार्थी सहायता केंद्र की सेवाएं 31 तक स्थगित

कोरोना वायरस के मद्देनजर एहतियाती कदम उठाते हुए इग्नू शिक्षार्थी सहायक केंद्र, इलाहाबाद डिग्री कॉलेज में शिक्षार्थी सहायक गतिविधियों और परामर्श कक्षाओं को 31 मार्च तक स्थगित करने कानिर्णय लिया गया है। इग्नू अध्ययन केंद्र के समन्वयक डॉ. श्रीप्रकाश सिंह के अनुसार अध्यक्ष केंद्र के सभी शिक्षार्थी 31 मार्च के बाद ही शिक्षार्थी सहायता केंद्र पर संपर्क करें।

‘मंत्रों से भी संभव है क्रिमि जनित रोगों का शमन’

नेहरू ग्राम भारती विश्वविद्यालय के ज्योतिष, कर्मकांड, वास्तुशास्त्र डिप्लोमा एवं संस्कृत विभाग के अध्यक्ष डॉ. देव नारायण पाठक ने कोरोना वायरस से बचाव के लिए छात्रों को नवग्रह के वैज्ञानिक पक्ष के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि वैदिक काल में हमारे ऋषि वैदिक मंत्रों के प्रयोग से क्रिमि जनित रोगों का शमन करते थे। उन्होंने रोगकारी क्रिमियों को नष्ट करने के लिए अग्निहोत्र विधि का भी वर्णन किया। इस मौके पर डॉ. रमेश मिश्र, डॉ. प्रभात कुमार, डॉ. वीरेंद्र मणि त्रिपाठी, लवकेश त्रिपाठी, बबली सिह, प्रदीप, विजय पटेल आदि मौजूद रहे।
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