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Prayagraj News: ‘मल्टी फ्रैक्चर’ का शिकार हुई सिविल लाइंस की मल्टीलेवल पार्किंग

Sun, 13 Sep 2026 02:05 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, प्रयागराज
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सिविल लाइंस व्यापार मंडल के सदस्यों के द्वारा डीपी सिटी के ज्ञापन दिया गया। अमर उजाला - फोटो : Department
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सिविल लाइंस स्थित मल्टीलेवल पार्किंग ‘मल्टी फ्रैक्चर’ का शिकार हो गई है। बहुमंजिला इमारत वाली इस पार्किंग में जगह-जगह रैम्प टूटे हैं। वाहन खड़ा करने वाले स्थान पर बड़े-बड़े गड्ढे हैं, जिसमें पानी भरा हुआ है।
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पार्किंग में तकरीबन 500 चारपहिया वाहन खड़े किए जा सकते हैं लेकिन स्थिति इतनी खराब है कि पार्किंग की क्षमता आधी भी नहीं रह गई है। नतीजा यह कि सिविल लाइंस के एमपी मार्ग और एसपी मार्ग पर वाहनों का लोड बढ़ने से जाम की जबरदस्त समस्या पैदा हो गई है। सिविल लाइंस व्यापार मंडल के सदस्यों ने शनिवार को डीसीपी सिटी सागर जैन की बैठक में समस्या उठाई तो वह खुद हालात देखने पहुंच गए। डीसीपी ने समस्या उच्चाधिकारियों तक पहुंचाने की बात कही है।

सिविल लाइंस व्यापार मंडल के अध्यक्ष सुशील खरबंदा और महामंत्री शिव शंकर सिंह के नेतृत्व में व्यापारियों ने पार्किंग संचालक से बातचीत की। निरीक्षण में पार्किंग तक पहुंचने वाली सड़क पर पानी और गड्ढे मिले। पार्किंग के प्रथम तल के फर्श पर भी छह इंच से डेढ़ फीट तक गहरे गड्ढे दिखाई दिए।
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व्यापारियों के मुताबिक, पार्किंग की लिफ्ट खराब होने से ऊपरी मंजिलों पर वाहन खड़े करने वाले लोगों को सीढ़ियों से आना-जाना पड़ता है। इससे लोग पार्किंग का उपयोग करने से बच रहे हैं। व्यापार मंडल जल्द नगर निगम के अधिकारियों से वार्ता कर समस्याओं के समाधान की मांग करेगा। वहीं, बैठक में अखिल भारतीय उद्योग व्यापार मंडल और शाहगंज सर्व व्यापार मंडल के अध्यक्ष अनिमेष अग्रवाल ने भी कई समस्याएं गिनाईं।
पार्किंग में मूलभूत सुविधाएं तक नहीं
- सिविल लाइंस व्यापार मंडल के अध्यक्ष सुशील खरबंदा का कहना है कि मल्टीलेवल पार्किंग में मूलभूत सुविधाओं की भी कमी है। वहां हर फ्लोर पर शौचालय तो हैं लेकिन ज्यादातर बंद हैं। जो खुले हैं, वे इतने गंदे हैं कि उनका उपयोग नहीं किया जा सकता। साफ-सफाई भी बदतर हालत में है। लिफ्ट खराब होने के कारण टूट-फूटे रैम्प से उतरते वक्त दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। बहुत से लोग तो पार्किंग में प्रवेश के लिए वहां की हालत देखते ही तुरंत बाहर चले जाते हैं। मजबूरी में उन्हें सड़क किनारे वाहन खड़े करने पड़ते हैं।
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