church does not open in locks on good friday prayers in homes
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कोरोना वायरस के खौफ के बीच मसीही समुदाय की आस्था का प्रतीक पर्व गुड फ्राइडे भी शुक्रवार महज रस्म अदायगी भर की जा सकी। इस पर्व पर गिरजाघरों के ताले नहीं खुले। प्रभु यीशु की याद में घरों में ही प्रार्थनाएं की गईं। इस दौरान मानवता की सेवा और रक्षा के लिए प्रभु यीशु से कामना की गई।
लॉकडाउन के बीच शुक्रवार को मसीही समुदाय के पर्व गुड फ्राइडे पर न गिरजाघरों में दीप जले न प्रार्थनाएं हुईं। पत्थर गिरजा घर के अलावा सेंट जोसेफ चर्च, म्योराबाद चर्च समेत अन्य गिरजाघरों में मसीही समुदाय के लोगों को प्रवेश नहीं दिया गया। डायोसेशन ऑफ लखनऊ के विशप पीटर बलदेव और इलाहाबाद धर्मप्रांत के विशप राफी मंजली ने लॉकडाउन के बीच गिरजाघरों में न आने की समुदाय के लोगों से अपील की थी। इसका मसीही समुदाय ने पालन करते हुए घरों में ही प्रभु यीशु के नाम पर प्रार्थनाएं कीं। इस दौरान सोशल डिस्टेंसिंग का पालन किया गया। पादरी स्टीफेन ने बताया कि इसी दिन प्रभु यीशु के सूली पर लटकाया गया था। इस पर्व पर दोपहर 12 से तीन बजे तक गिरजाघरों में प्रार्थनाएं की जानी थीं, लेकिन कोरोना वायरस के डर की वजह से घरों में ही लोगों ने प्रभु यीशु का नमन किया। इस दौरान नैनी के कम्युनिटी चर्च में कलीसिया की ओर से मानवता के कल्याण के लिए विशेष प्रार्थना की गई।