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मजबूरी के सफर में सिसक रहा बचपन

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Childhood sobbed in the journey of helplessness - फोटो : ALDCOMPACT
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मां-बाप संग पैदल चलकर तय करनी पड़ रही मीलों की दूरी
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कोई कोरांव से मिर्जापुर तो कोई बनारस से रवाना हुआ कानपुर
प्रयागराज। लॉकडाउन के दौरान भी लोगों के आने का सिलसिला नहीं थम रहा है। सैकड़ों किमी की दूरी पैदल तय करने के बाद माता-पिता के साथ चल रहे उनके बच्चे भी थक कर चूर-चूर हो गए हैं। मंगलवार को शहर से गुजर रहे भूखे प्यासे और निढाल बच्चों को देखकर हर किसी का दिल पसीज गया। इन बेबस बच्चों के कदम डगमगा रहे थे, लेकिन माता-पिता उन्हें हिम्मत बंधाते हुए चले जा रहे थे।
सीएवी कालेज के पास राकेश कुमार अपने परिवार के साथ मिर्जापुर हलिया जाता मिला। साथ में पत्नी प्रमिला, 12 साल की बेटी रानी व दो साल का बेटा गोलू था। पूछने पर बताया कि वह परिवार समेत सोरांव में रहकर मजदूरी करता है। पिछले कई महीनों से वह वहां निर्माणाधीन बिल्डिंग में काम कर रहा था। 22 तारीख से काम बंद होने के बाद पैसा मिलना बंद हो गया। अगल बगल रहने वाले परिवार घर चले गए तो उसका परिवार अकेले बचा। ऐसे में सुरक्षा के लिए घर जाना ही ठीक समझा। हालांकि रास्ते में कहीं भी कोई साधन नहीं मिला। जिसके बाद सभी पैदल ही चल दिए। लगातार पैदल चलने से मासूम गोलू व रानी बेहाल थे। किसी तरह दोनों बच्चों को समझाकर मां-बाप आगे बढ़ते रहे।
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इसी प्रकार केपी कम्युनिटी हाल के पास वाराणसी से आए रविशंकर परिवार समेत सड़क किनारे बैठे मिले। साथ ही में पत्नी रेखा के अलावा 11 साल का बेटा आकाश व 10 साल की बेटी रीता थी। बताया कि वाराणसी में रहकर परिवार चाट-फुल्की बेचकर पेट पालता था। बंदी के बाद से घर का चूल्हा जलना भी मुश्किल हो गया। ऐसे में कानपुर स्थित घर लौटने की सोची। कोई साधन नहीं मिला तो पैदल ही चल दिए। रास्ते में लोगों ने खाना तो खिलाया लेकिन कोई साधन न मिलने की वजह से बेहद परेशानी हुई। उधर दोनों बच्चों की हालत भी बेहद खराब थी, जिसे देखकर मां-बाप बेहद व्यथित दिखे। यह परिवार जगह-जगह रुककर थोड़ी देर आराम करने के बाद ही आगे बढ़ता रहा।
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बॉर्डर सील, फिर भी आ रहे लोग
प्रयागराज। जिले की सीमाएं सील किए जाने के बावजूद दूसरे जनपदों से लोग यहां पहुंच रहे हैं। मंगलवार दोपहर भी चाकघाट से 29 लोग ट्रक पर सवार होकर जिले में आ गए। सूचना मिली तो चौकी प्रभारी बैरहना अमर सिंह परमार ने बांगड़ चौराहे पर ट्रक को रोककर इसमें सवार लोगों से पूछताछ की तो पता चला कि सभी नागपुर से आ रहे हैं और उन्हेें बिहार, प्रतापगढ़ जाना है। यह भी बताया कि सभी एमपी-यूपी सीमा पर चाकघाट तक पैदल पहुंचे थे, जिसके बाद पुलिसवालों ने शहर की ओर आ रहे ट्रक पर सभी को बैठा दिया।

Childhood sobbed in the journey of helplessness- फोटो : ALDCOMPACT

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