इसके खिलाफ हाईकोर्ट पहुंचे दोषियों ने पोते की गवाही पर सवाल उठाए। कहा कि घटना के वक्त कम उम्र के कारण बच्चा घटना को समझने में सक्षम नहीं था। गवाही के दौरान उसके बयान में कई विसंगतियां थीं। लिहाजा उसकी गवाही मान्य नहीं है।
कोर्ट ने इस दलील को सिरे से खारिज कर दिया। कहा कि इस क्रूर घटना के वक्त मौजूद बच्चा ही सच्चा गवाह है। बच्चे अपनी आंखों के सामने होने वाली असामान्य और भयानक घटनाओं के प्रति अत्यंत संवेदनशील होते हैं। जीवन भर ऐसी घटनाओं को नहीं भूलते। यदि उसकी गवाही में स्वाभाविकता है और वह बिना किसी दबाव या सिखाए-पढ़ाए गवाही दे रहा है, तो उसकी गवाही को केवल कम उम्र के आधार पर नकारा नहीं जा सकता।
टिप्पणी : एक बात झूठ तो सब झूठ का सिद्धांत लागू नहीं
एक बात झूठ तो सब झूठ का सिद्धांत इस मामले में लागू नहीं होता। यदि गवाह की छोटी-मोटी बातों में विसंगतियां हैं तो भी उसकी मुख्य और सत्य गवाही के आधार पर सजा दी जा सकती है। - हाईकोर्ट