कुपोषण और इसके खिलाफ लड़ाई में प्रशासनिक दावों की सच्चाई जानने के लिए अमर उजाला ने गांवों में जाकर पड़ताल की तो निराशाजनक स्थिति सामने आई। कोरांव के लेडिय़ारी स्थित मुसहर बस्ती के गुलाब, बुल्ले और सुरेश कुमार के बच्चे गंभीर रूप से कुपोषण का शिकार हैं। गांव में नवीन स्वास्थ्य केंद्र भी है लेकिन फार्मासिस्ट के भरोसे। ग्रामीण कम उम्र में ही अपनी बच्चियों की शादी कर रहे हैं।
यही वजह है कि बच्चे भी सामान्य से कमजोर पैदा होते हैं। हालांकि प्रधान श्याम नारायण का कहना था कि गांव में सब ठीक है। बाल विवाह की जानकारी उन्हें नहीं है। वहीं स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी शिव सिंह ने पोषण की योजनाओं के प्रति अनभिज्ञता जताई। आंगनबाड़ी सहायिका सुषमा देवी का कहना है कि सभी पात्रों को निर्धारित राशन दिया जा रहा है। एएनएम नीलम का भी दावा है कि गर्भवती महिलाओं की नियमित जांच की जाती है।
| कुपोषित | अति कुपोषित | |
| शहर | 9548 | 1892 |
| ग्रामीण | 67461 | 11674 |
| कुल | 77009 | 13566 |