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एक विशेष जज के यहां मुकदमा न लगाने की वकील की मांग खारिज कर हाईकोर्ट ने लगाया 20 हजार हर्जाना

Wed, 23 Jun 2021 09:10 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

  • इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक वकील द्वारा अपने मुकदमे के एक विशेष जज की अदालत में न लगाए जाने की मांग नामंजूर करते हुए कहा है कि हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ही मास्टर आफ रोस्टर है। 
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allahabad high court - फोटो : social media
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विस्तार
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक वकील द्वारा अपने मुकदमे के एक विशेष जज की अदालत में न लगाए जाने की मांग नामंजूर करते हुए कहा है कि हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ही मास्टर आफ रोस्टर  है। उन्हीं के प्राधिकार से मुकदमों की सूची निबंधक कार्यालय तैयार करता है।
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यह चीफ जस्टिस का अधिकार है कि कौन सा मुकदमा किस जज के समक्ष सुनवाई के लिए लगाया जाए। हाईकोर्ट रजिस्ट्री  को यह आदेश  नहीं दिया जा सकता कि  किसी खास वकील के मुकदमे खास जज के सामने न लगाये जाए। कोर्ट ने याचिका को दिग्भ्रमित मानते हुए खारिज कर दिया और व्यर्थ की मांग को लेकर याचिका दाखिल करने पर अधिवक्ता पर 20 हजार रुपये हर्जाना भी लगाया है। 

यह आदेश न्यायमूर्ति मनोज मिश्र तथा न्यायमूर्ति ए के ओझा की खंडपीठ ने अधिवक्ता अरूण मिश्र की याचिका पर दिया है। कोर्ट ने कहा कि बड़ी अजीब बात है कि ऐसी मांग को लेकर हाईकोर्ट को पक्षकार बनाकर याचिका दाखिल  की गई है।
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याची का कहना था कि हाईकोर्ट की एक विशेष महिला जज के खिलाफ उन्होंने सुप्रीम कोर्ट व राष्ट्रपति को शिकायत भेजी है। इसलिए उनके दाखिल मुकदमे उन जज की अदालत में  सुनवाई के लिए न लगाये जाए। कोर्ट ने इस मांग को उचित नहीं माना  और कहा कि कौन से मुकदमा किस अदालत में लगेगा यह तय करने का अधिकार मुख्य न्यायाधीश को होता है।
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