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चीफ  को भारी पड़ी शिकायत

Mon, 03 Oct 2016 02:36 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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मार्ग बहाली में जुटे लोनिवि के कर्मचारी। - फोटो : अमर उजाला
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इलाहाबाद। पीडडब्ल्यूडीके चीफ इंजीनियर हरेंद्र नाथ पांडेय को एक ठेकेदार की शिकायत करना भारी पड़ गया। चीफ इंजीनियर का स्थानांतरण लखनऊ कर दिया गया है। उन्होंने पांच साल पहले बजट आवंटित होने के बावजूद यमुनापार में शंकरगढ़ के प्रतापपुर से मिर्जापुर को जोड़ने वाले मार्ग (मेजा के आगे) और जीटी रोड (कानपुर मार्ग) नहीं बनाए जाने की शिकायत शासन से की थी। इसमें बजट150 करोड़ रुपये में खेल किए जाने की बात सामने आ रही है। एजेंसी को सड़क बनाने का काम 2011 में ही सौंपा गया था लेकिन आज तक दोनों मार्ग अधूरे हैं। मामले में ठेकेदार बहाना बना रहा है। कागजों पर फर्जी रिपोर्ट भी तैयार की जा रही है। चीफ इंजीनियर ने कार्यदायी संस्था पर काम करने का दबाव बनाया तो उनका स्थानांतरण कर दिया गया। विभाग के अफसर पर यह कार्रवाई चर्चा का विषय बनी है।
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प्रांतीय खंड चार के अंतर्गत मिर्जापुर रोड को जोड़ने वाली भारतगंज से शंकरगढ़ के पास प्रतापपुर तक कुल 101 किलोमीटर सड़क (सात मीटर चौड़ी) का काम वर्ष 2011 में एक संस्था को सौंपा गया था। इसके लिए कुल 139 करोड़ रुपये के बजट निर्धारित था। इसमें से कार्यदायी संस्था को 107 करोड़ रुपये आवंटित किए जा चुके हैं, लेकिन काम 40 फीसदी से भी कम हुआ है जबकि शर्तों के अनुरूप 80 फीसदी काम पूरा होना चाहिए था। संस्था ने जो काम भी किया है वह बहुत ही खराब है। सड़क बनने के साथ ही उखड़ गई है। बारा विधायक डॉ. अजय भारती ने इस मामले को विधान सभा में भी उठाया था। 

मार्ग के निर्माण में हो रहा बड़ा खेल 
मिर्जापुर को जोड़ने वाले मार्ग पर बड़ा खेल खेला जा रहा है। विभागीय सूत्रों के मुताबिक 2011 में आवंटित बजट में संस्था विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत से हजम करने की फितरत में हैं। मामला पांच साल पुराना होने से लोगों के ध्यान में रह ही नहीं जाएगा और संस्था बिना कार्य कराए ही कागज पर यह दिखाने की कोशिश में लग गई है कि उसने सड़क बनाई थी, अब उखड़ गई है। 
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