भक्ति को दक्षिण से पूरब की तरफ लाए रामानंदाचार्य
स्वामी दिनेशाचार्य महाराज ने कहा कि भक्ति के जितने आचार्य हैं, सब दक्षिण के हैं। सिर्फ जगद्गुरु रामानंदाचार्य महाराज हैं जो भक्ति को दक्षिण से पूर्व तक लेकर आए। समाज बंट रहा है, कट रहा है, छंट रहा है। आज से 700 वर्ष पूर्व भी भारत की स्थिति ऐसी ही थी। धर्म व संप्रदाय के नाम पर लोगों को बांटा जा रहा था। रामानंदाचार्य ने अलग-अलग मोतियों को इकट्ठा कर उन्हें एक सूत्र में पिरोया। ब्राह्मण, क्षत्रिय, नाई, महिलाओं समेत सभी वर्ग के लोगों को शिष्य बनाया।
पूर्व की सरकारों के दौरान धारा में लालपन हुआ करता था, आचमन की इच्छा नहीं होती थी
स्वामी विद्या चैतन्य ने कहा कि एक वक्त था कि पावन गंगा जल के लिए साधु-संत आंदोलन करते थे। यहां की धारा में लालपन हुआ करता था। आज गंगा की पवित्र धारा को देखो तो स्नान व पीने की इच्छा होती है। पूर्व की सरकारों में आचमन की इच्छा भी नहीं होती थी। स्वामी वैदेही वल्लभदेवाचार्य महाराज ने कहा कि गंगाजल इतना साफ व स्वच्छ हाे चुका है कि एक सुई को भी गंगा में डाल दिया जाए तो ढूंढ़ा जा सकता है।