टोक्यो ओलंपिक के पहले दिन भारोत्तोलन स्पर्धा में भारत को रजक पदक दिलाने वाली मीराबाई चानू की उपलब्धि पर शहर की वेट लिफ्टर बेटियां गर्व महसूस कर रही हैं। उनका कहना है कि चानू की जीत ने देश का मान बढ़ाया है। हमें उनकी जीत से बेहतर करने की प्रेरणा मिली है। हम भी उनके जैसा प्रदर्शन कर आगामी ओलंपिक में देश के लिए पदक लाने की कोशिश करेंगे।
नैनी की रहने वाली वेट लिफ्टर निधि मिश्रा राज्य विश्वविद्यालय से बीएएलएलबी की छात्रा हैं। वह यूनिवर्सिटी स्तर पर खेलती हैं। निधि ने बताया कि उन्हें पूरी उम्मीद थी कि इस बार भारोत्तलन स्पर्धा में कई सालों से पदकों का टोटा खत्म होगा। मीराबाई चानू से उम्मीद थी कि वह भारत के लिए जरूर पदक लाएंगी। निधि ने बताया कि वह पूरे मैच के दौरान टीवी से चिपकी रहीं।
जैसे ही चानू मैडम को पदक मिला, वह खुशी से उछल पड़ीं। उनके प्रदर्शन से कुछ बेहतर करने की प्रेरणा मिली है। इसी तरह क्रास्थवेट इंटर कॉलेज की छात्रा तिष्यरक्षिता मदन मोहन मालवीय स्टेडियम में भारोत्तोलन का अभ्यास करती हैं। उनका कहना है कि ओलंपिक में भारत को पहले दिन रजत पदक मिला। यह बहुत खुशी की बात है। चानू की जीत से देश का मान तो बढ़ा ही है। हमारे अंदर भी एक विश्वास पैदा हुआ है कि हम कुछ अच्छा कर सकते हैं। जब अपने देश का खिलाड़ी बेहतर प्रदर्शन करता है तो उससे हौसला बढ़ता है।
शहर की वेट लिफ्टर खिलाड़ी आराध्या पाठक ने कहा कि मीराबाई चानू की जीत ने हमारा हौसला बढ़ाया है। देश के खिलाड़ी की जीत से दूसरे खिलाड़ियों का हौसला बढ़ता है। साथ ही हमारे जैसे युवा खिलाड़ियों को भी आगे बेहतर प्रदर्शन की प्रेरणा मिली है। शहर की भारोत्तोलक खिलाड़ी श्रद्घा शुक्ला और सोनल तिवारी का कहना है कि पूरे मैच को लाइव तो देखा ही, इसके बाद भी दिनभर में उसके मैच का कई वीडियो भी देखा।
मीराबाई चानू की जीत से बहुत खुशी मिली है। हमारे अंदर भी एक ऊर्जा आई है कि हम भी उनके जैसा प्रदर्शन कर सकें। भारोत्तलक संघ प्रयागराज शाखा के सचिव विक्रांत मिश्र का कहना है कि हमारे लिए गर्व की बात है। मीराबाई चानू ने 21 साल देश के लिए रजत पदक दिलाया। देश का कोई भी खिलाड़ी जीतता है तो उनके कोच और युवा खिलाड़ियों का हौसला बढ़ता है। उनको बेहतर करने की प्रेरणा मिलती है।