इलाहाबाद विश्वविद्यालय में नए सत्र के लिए प्रवेश प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इसके साथ नियमों में बदलाव की भी कवायद शुरू हो गई है। पिछले साल कई बिंदुओं पर काफी विवाद हुआ था। इसकी सूची तैयार की जा रही है। प्रवेश समिति की बैठक में इन विवादों का हल निकाला जाएगा। कई विवादों के समाधान के लिए नियमों में भी बदलाव किया जाएगा।
सबसे अधिक विवादविकलांग कोटे के तहत प्रवेश को लेकर रहा। अभ्यर्थियों की मांग की थी कि आरक्षण में विकलांगता के प्रतिशत को भी आधार बनाया जाए। इसके विपरीत विश्वविद्यालय प्रशासन के पास इसे लेकर कोई स्पष्ट नीति नहीं थी। हालांकि अब उसमें सुधार की कवायद की जा रही है। अफसरों का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के अनुसार मेरिट तैयार करते समय आरक्षण का लाभ दिया जा सकता है। इसके बाद विकलांगता के प्रतिशत को आधार नहीं बनाया जा सकता। इसके अलावा विकलांग कोटे के तहत 0.30 फीसदी आरक्षण है, वह भी क्षैतिज। इस तरह से 33 सीट होने पर इस कोटे के तहत एक छात्र को प्रवेश मिलेगा। इसे लेकर काफी विवाद हुआ।
हिन्दी विभाग में तो इसकी वजह से प्रवेश प्रक्रिया भी टाल दी गई है। हालांकि प्रवेश समिति से जुड़े अफसरों ने अब इसका भी समाधान निकाल लिया है। उनके अनुसार सुप्रीम का आदेश है कि पांच या इससे अधिक सीट है तो विकलांग कोटा के तहत एक प्रवेश लेना होगा। इसके अलावा कई अन्य बिंदुओं पर भी विवाद रहा, जिसका समाधान ढूंढ़ा जा रहा है। इसे प्रवेश समिति के सामने रखा जाएगा। नियमों को ब्रोसर में भी स्पष्ट किया जाएगा। प्रवेश प्रकोष्ठ के निदेशक प्रोफेसर जगदम्बा सिंह ने अंतिम निर्णय होने तक इस बारे में जानकारी देने से मना कर दिया लेकिन इतना जरूर कहा कि विवादों की सूची तैयार की जा रही है। इन्हें दूर किया जाएगा जिससे कि आगे किसी तरह का विवाद न होने पाए।
इलाहाबाद विश्वविद्यालय की स्नातक और परास्नातक की प्रवेश परीक्षाओं के लिए कानपुर भी केंद्र होगा। कानपुर तथा आसपास के जिलों से अधिक आवेदन को ध्यान में रखकर यह निर्णय लिया गया है। हालांकि कई केंद्र बाहर भी कर दिए गए हैं। भोपाल, पटना और विलासपुर में विगत वर्षों में काफी कम अभ्यर्थी रहे। इसलिए इन तीनों जनपदों में केंद्र नहीं बनाने का निर्णय लिया गया है।