इलाहाबाद (ब्यूरो)। मुक्तिबोध की पुण्यतिथि पर शुक्रवार को महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय में ‘स्मरण: मुक्तिबोध’ कार्यक्रम आयोजित किया गया। केंद्र प्रभारी प्रो. संतोष भदौरिया ने कहा कि मुक्तिबोध ने अपने विचार और लेखन में कविता, आलोचना के प्रतिमान बदले हैं। मुक्बिोध में यह साहस था कि सौंदर्य के प्रतिमान चांद के मुंह को भी टेढ़ा कहा। ‘अंधेरे में’ कविता की शोभायात्रा के तमाम खलनायक आज नायक की भूमिका में हमारे सामने हैं। मुक्तिबोध के विचारों और उनकी कविता को समझने के लिए हमें बार-बार उनकी ओर मुखातिब होना होगा।
युवा लेखक डॉ. प्रेमशंकर ने कहा कि मुक्तिबोध के समस्त लेखन में मौजूद विडंबना अन्याय और शोषण से उपजती है। उनकी कविताओं में आत्मसंघर्ष का स्वर प्रमुख है। समातामूलक समाज की स्थापना उनकी चेतना का केंद्र बिंदु है। इस दौरान मुक्तिबोध की प्रसिद्ध कविताओें ‘अंधेरे में’, ‘भूल गलती’, ‘ओ मेेरे आदर्श वादी मन’ पर बने वृत्तचित्रों का प्रदर्शन भी किया गया। मणि कौल निर्देशित फिल्म सतह से उठता आदमी को प्रदर्शित किया गया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. सपना सिंह ने किया। इस दौरान डॉ. विधु खरे दास, डॉ. सालेहा जरीन, डॉ. अनुपमा राय समेत काफी संख्या में लोग मौजूद रहे।